बर्फबारी से सेब की अच्छी पैदावार होने के आसार

  • चमोली जिले में जोशीमठ, थराली और घाट ब्लाक सेब के अच्छे उत्पादक क्षेत्र हैं. सुदूरवर्ती इन क्षेत्रों में करीब तीन सौ अधिक गांव बर्फ से लकदक हैं
  • अच्छी पैदावार के लिए इसे एक हजार से 13 सौ घंटे तक रहना चाहिए. इससे उत्पादन के साथ ही गुणवता प्रभावित होती है. डंगवाल बताते हैं

गोपेश्वर, 01 जनवरी
चमोली जिले में इस बार माह नवम्बर व दिसम्बर में हुई बर्फबारी से सेब की अच्छी पैदावार होने के आसार बढ़ गये हैं. जिससे सेब उत्पादकों के चेहरे पर लाली छाई हुई है. यदि बर्फबारी का यही सिलसिला रहा तो इस बार काश्तकारों को अच्छी आमदानी मिल सकती है.

चमोली जिले में जोशीमठ, थराली और घाट ब्लाक सेब के अच्छे उत्पादक क्षेत्र हैं. सुदूरवर्ती इन क्षेत्रों में करीब तीन सौ अधिक गांव बर्फ से लकदक हैं. खेत-खलिहान हों या पहाड़ चारों ओर बर्फ के आगोश में है. घाट ब्लाक में रामणी गांव के सेब उत्पादक सुदर्शन सिंह कठैत कहते हैं. लंबे समय बाद कुदरत मेहरबान हुई है.

पिछले साल कम बर्फबारी से उत्पादन प्रभावित हुआ था. मलारी हाईवे पर भापकुंड में सेब के कारोबारी मुरखुल्या सिंह रावत कहते हैं कि मार्च से सेब के पेड़ों पर फलावरिंग शुरू हो जाती है. इस बार चिलिंग प्वाइंट अच्छा मिला है तो पैदावार भी अच्छी होनी चाहिए.

बशर्ते यह क्रम मार्च के पहले सप्ताह तक बना रहे. चमोली के उद्यान निरीक्षक डीपी डंगवाल ने बताया कि जिले में 290 हेक्टेयर में सेब के बागान हैं और यहां औसतन 32 सौ मैट्रिक टन उत्पाद होता है. कहते हैं कि सेब के लिए सबसे जरूरी है चिलिंग प्वाइंट.

अच्छी पैदावार के लिए इसे एक हजार से 13 सौ घंटे तक रहना चाहिए. इससे उत्पादन के साथ ही गुणवता प्रभावित होती है. डंगवाल बताते हैं कि अधिक बर्फबारी से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले फंगल खत्म हो जाते है. उत्तराखंड में सेब की प्रमुख प्रजातियां रेड डेलिशस, राॅयल डेलिशस, अर्ली सनवरी, ग्रीन स्वीप, गोल्डन, सेनी, रेड गोल्डन आदि पाई जाती है.

हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश

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