आ रही है नई टेक्नोलॉजी अब आपका फोन होगा आपके दिमाग का मालिक

नई दिल्ली. टेक्नोलॉजी में वो ताकत है जो इंसान की किसी भी कमी को पूरा कर दे सकती है. बात देखने की हो या सुनने की या फिर हाथ-पैरों की अक्षमता की, टेक्नोलॉजी इंसान की कमी को पूरा करने और उसे सक्षम बनने के तमाम ऑप्शन दिए हैं.टेक्नोलॉजी किस हद तक हमारी जिंदगी को बदल सकती है. इस बात का अंदाजा हम दुनिया के महूशर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को देखकर लगा सकते है.

टेक्नोलॉजी के जरिए सब संभव-

टेक्नोलॉजी के जरिए अपनी शारीरिक अक्षमता को मात देने का जो कारनामा मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने कर दिखाया है, बेमिसाल है. वह दुनिया के उन चंद लोगों में गिने जाते हैं जिनकी खोज ने ब्रह्मांड को समझने का नजरिया बदल दिया. साइंस पर लिखी गई अब तक की सबसे पॉपुलर किताब द ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम को लिखने के बाद इनका नाम सबकी जुबान पर चढ़ गया.

किताब की खासियत-

उस किताब की खासियत थी साइंस की जटिल थ्योरीज को आसान तरीके से समझाना. शुरुआत से ही काफी होनहार रहे स्टीफन हॉकिंग जवानी तक आते-आते एक ऐसी बीमारी का शिकार हुए जिसमें दिमाग शरीर पर धीरे-धीरे अपना कंट्रोल छोड़ता जाता है. डॉक्टरों ने कहा, वह अब बस चंद महीनों के मेहमान हैं.

शरीर धीरे-धीरे साथ छोड़ता गया

इसके बाद हॉकिंग निराश तो हुए लेकिन हारे नहीं उन्होंने उस वक्त टेक्नोलॉजी का सहारा लेना शुरू किया और वक्त के साथ नई-नई तकनीकों को अपनाते गए. जहां शरीर धीरे-धीरे साथ छोड़ता गया वो टेक्नोलॉजी से हाथ मिलाते चले गए.

खुद को कभी किसी से कमजोर नहीं समझा-

भले ही हॉकिंग आज हमारे बीच में न हो लेकिन उन्होंने अपनी सारी जिंदगी टेक्नोलॉजी के सहारे ही गुजारी है और खुद को कभी किसी से कमजोर नहीं समझा. उनके साथ आलम यह था कि टेक्नोलॉजी उनकी आखों की हरकत और उंगली के इशारों को शब्दों और दस्तावेजों में तब्दील कर देती थी.

ये बात हमने आपको इसलिए बताई क्योंकि टेक्नोलॉजी आज के दौर में हमारी जिंदगी पर बुरी तरीके से हावी हो चुकी है.कई तरीकों से ये हमारे लिए अच्छी है तो कई वजहों से ये हमारे लिए बुरी भी है.

टेक्नोलॉजी कंट्रोल करेगी शरीर-

आज के समय में टेक्नोलॉजी के जरिए लगभग हमारे शरीर के हर अंग को कंट्रोल की जा सकता है. मगर हमारे शरीर का एक अंग अब भी ऐसा है जो टेक्नोलॉजी के जरिए कंट्रोल नहीं हो सकता है.वो है हमारा दिमाग.लेकिन हो सकता है कि अगले साल तक ऐसी टेक्नोलॉजी आ जाए जो कि हमारे दिमाग को हमारे कंप्यूटर या फिर स्मार्टफोन से जोड़ दे. दुनिया की सबसे मशहूर कंपनियों में से एक टेस्ला के चीफ एग्जिक्यूटिव और स्पेस X के संस्थापक एलन मस्क ने इस नई और आनोखि योजना का ऐलान किया.

ऐलान मस्क का ऐलान-

एलन मस्क की सीक्रेटिव कंपनी ने सैन फ्रांसिस्को में एक इवेंट के दौरान इस बारे में जानकारी दी. कंपनी ने बताया कि न्यूरालिंक एक ब्रेन-मशीन इंटरफेस को विकसित कर रही है जिससे ह्यूमन ब्रेन और कंप्यूटर को कनेक्ट किया जाएगा.

ऐसे काम करेगी टेक्नोलॉजी-

कंपनी ने बताया है कि इस तकनीक की मदद से दिमाग में 4X4mm की एक चिप फिट कर दी जाएगी.यह चिप हज़ारों माइक्रोस्कोपिक थ्रेड से कनेक्टेड होगी. इन थ्रेड्स में लगे हुए इलेक्ट्रोड्स न्यूरल स्पाइक्स को मॉनीटर करने में सक्षम होंगे.

कंपनी के पूर्व सीईओ एलन मस्क के मुताबिक इस टेक्नोलॉजी के ज़रिये मानव दिमाग को कंप्यूटर से जोड़ दिया जाएगा, जिससे कंप्यूटर न सिर्फ इंसान के दिमाग को पढ़ पाएगा बल्कि उसे कंट्रोल करने की स्थिति में भी होगा.

कंपनी के मुताबिक इंसानों के दिमाग की स्किन में चिप लगाकर उसे वायर के ज़रिये कनेक्ट किया जाएगा और इन्हें कानों के पीछे फिट किए गए रिमूवेबल पॉड से लिंक किया जाएगा. फिर इसे किसी डिवाइस जैसे कंप्यूटर या स्मार्टफोन से कनेक्ट कर दिया जाएगा जिससे दिमाग की सारी जानकारी को डिवाइस में सेव किया जा सकेगा.

इंसानों पर अभी इसका प्रयोग बाकी-

अभी तक कंपनी ने इस नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग चूहों और बंदरों पर किया गया है. इंसानों पर अभी इसका प्रयोग किया जाना बाकी है.जिस पर लगातार काम चल रहा है और वो आने वाले एक साल के अंदर पूरा हो जाएगा.

आज तक हमाने ऐसी टेक्नोलॉजी के बारे में सिर्फ सुना है या फिर मूवी में देखा है.ऐसे में अब देखना ये होगा कि ये टेक्नोलॉजी कितनी दिलचस्प होने वाली है.साथ ही इसके आने के बाद हमारी लाइफ किस तरीके से बदल जाती है.

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