चुनाव का स्वागत : सामान्य होते हालात

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने व राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद से उपजी स्थिति में अब काफी सुधार देखने को मिल रहा है. परिणाम यह हुआ कि राज्य के 310 ब्लॉक विकास परिषद की चुनाव प्रक्रिया शुरू हो
सकी है. जम्मू कश्मीर में 4200 पंचायतें हैं. वर्ष 2018 में नवंबर-दिसंबर में पंचायत चुनाव हुए थे, लेकिन ब्लॉक और जिला विकास परिषदों व बोर्डों का गठन नहीं हुआ था.

केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त को राज्य में सम विकास के तर्क पर अनुच्छेद 370 को हटाते हुए जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू- कश्मीर और लद्धाख, दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. अलगाववादियों,आतंकियों व पाकिस्तान द्वारा इस दौरान जम्मू-कश्मीर को सुलगाने की लाख कोशिशों के बावजूद परिस्थितियां सामान्य होने लगी हैं. इसे लेकर जहां एक ओर जम्मू व लद्धाख पहले से ही खुश दिखा, वहीं कश्मीर घाटी में कुछ तनाव जरूर देखने को मिला. अब तो कुछ
संवेदनशील इलाकों को छोड़कर पूरी कश्मीर घाटी में भी दिन में कहीं कोई पाबंदी नहीं है. सभी प्रकार के निजी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं. अलगाववादियों तथा आतंकियों की धमकियों के बावजूद दुकानदार सुबह शाम अपनी दुकानें खोल रहे हैं और लोग भी बिना किसी डर के खरीदारी कर रहे हैं

रेहड़ी-फह्ड़ी वाले व जमीन पर सामान लगाकर बेचने वाले बेखौफ दिखाई दे रहें हैं. रोज़ाना की तरह सेब की मंडियां भी लग रही हैं. कार्यालयों में भी उपस्थिति सामान्य से अधिक देखी जा रही है. कश्मीर घाटी के दो जिलों कुपवाड़ा व हंदवाड़ा में मोबाइल सेवा व पूरी कश्मीर घाटी में दूरभाष सेवा को बहाल कर दिया गया है.

इस सबके बावजूद जम्मू कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवा अभी भी बंद है. प्रशासन ने श्रीनगर समेत कुछ और कस्बों में मोबाइल सेवा बहाल करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. सभी संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है ताकि शरारती तत्वों पर काबू पाया जा सके.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 16 -31 अक्टूबर अंक में…

Leave a Comment

%d bloggers like this: