इस तारीख को है हरियाली तीज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…..

नई दिल्ली. हरियाली तीज हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा करती हैं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. इस बार 3 अगस्त को हरियाली तीज मनाई जाएगी.

महिलाएं इस दिन मां पार्वती और भगवान शंकर की पूजा करती हैं और अपने पति के लंबी आयु की कामना करती हैं. व्रत रखती हैं. श्रृंगार कर शिव-पार्वती पूजन किया जाता है.

इस साल ये हरियाली ती 3 अगस्त यानि शनिवार को मनाया जाएगा. इस खास दिन सभी औरतें अपनी पति के लिए व्रत रखती हैं वही कुंवारी लड़किया एक अच्छे वर को पाने के लिए भी रखती हैं.

इस खास दिन पर महिलाएं अच्छे कपड़ो के साथ-साथ मेहंदी भी लगाती हैं. अलग-अलग प्रकार के मेहंदी के डिजाइन हाथों में लगा कर महिलाएं बेहद ही खूबसूरत लगती हैं. इस दिन चारों तरफ बेहद खूशनूमा माहौल होता है.

हरियाली तीज की पंरपरा
कई राज्यों में इस दिन नवविवाहित लड़कियों को मायके बुला लिया जाता है और ससुराल से कपड़े, गहनें, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाई भेजी जाती है. जबकि कुछ राज्यों में स्त्रियां ससुराल में रहकर ही इस पूजा को सम्पन्न करती हैं.

व्रत रखती हैं और पति की सुख, समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं. मायके से उनके लिए कपड़े, गहने, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाई भेजी जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन विवाहिता को मायके से भेजी गई चीजों को प्रयोग करना चाहिए.

इस दिन झूला झूलने का भी खास महत्व है. बता दें कि हरियाली तीज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इसे छोटी तीज या श्रावण तीज भी कहते हैं. इसके 15 दिनों बाद एक और तीज होती है कजरी तीज. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई शहरों में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है.

हरियाली तीज की व्रत पूजा विधि– सुबह उठ कर स्‍नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद मन में पूजा करने का संकल्प लें और ‘उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये’ मंत्र का जाप करें.

पूजा शुरू करने से पूर्व काली मिट्टी से भगवान शिव और मां पार्वती तथा भगवान गणेश की मूर्ति बनाएं. फिर थाली में सुहाग की सामग्रियों को सजा कर माता पार्वती को अर्पण करें. ऐसा करने के बाद भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाएं. उसके बाद तीज की कथा सुने या पढ़ें.

हरियाली तीज उत्सव को भी भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस कड़ी तपस्या से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया.

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