शेहला रशीद पर दर्ज हुआ देशद्रोह का मामला, जाने कब बना था कानून?

JNU की पूर्व छात्र शेहला रशीद पर सेना के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के मामले में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो गया है. शेहला कश्मीर की रहने वाली हैं, और 18 अगस्त को उन्होंने भारतीय सेना पर कश्मीरियों के साथ अत्याचार करने का आरोप लगाया था.

शेहला ने भारतीय सेना पर कश्मीर में लोगों को घरों में बंधक बनाकर मारपीट करने, कश्मीरियों के घरों में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने आज उनपर IPC की धारा 124A के तहत देशद्रोह, IPC- 153A के तहत धर्म के आधार पर नफरत फैलाना और IPC- 153 के तहत उपद्रव फैलाने की कोशिश करने के मामले में FIR दर्ज की गई है.

क्या है देशद्रोह का कानून?

देशद्रोह के अपराध में IPC- 124A के तहत कार्रवाई की जाती है. भारतीय दंड संहिता में IPC- 124A को परिभाषित भी किया गया है. IPC के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सरकार विरोधी चीजें लिखता है या फिर रखता है या फिर उस सामग्री का समर्थन करता है तो उस पर देशद्रोह कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

भारत के राष्ट्रीय चिन्ह और राष्ट्रीय ध्वज सहित अन्य राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करना भी देशद्रोह कानून के तहत आता है. भारतीय दंड संहिता के अनुसार राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने का मतलब है कि संविधान का अपमान करना. जिसके चलते आरोपी को इसी कानून के तहत दंड देने का प्रावधान है. इस कानून के तहत उम्रकैद या 3 साल की सजा का प्रावधान है.

कब बना था देशद्रोह कानून?

अंग्रेजों ने साल 1860 में देशद्रोह कानून को बनाया था. और 1870 में इसे IPC में शामिल किया गया था. 1870 में बने इस कानून के तहत महात्मा गांधी पर भी मामला दर्ज किया गया था.

महात्मा गांधी ने 1870 में वीकली जनरल में ‘यंग इंडिया’ नाम से अंग्रेजी सरकार के खिलाफ एक लेख लिख दिया था, जिसके बाद उनपर देशद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था.

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