उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ की शीतल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest (8848 मीटर) पर फतह हासिल कर देश का नाम रौशन कर दिया है. शीतल ने गुरुवार सुबह 6 बजे माउंट एवरेस्ट पर पहली बार पहुंच तिरंगा लहराया. करीब 15 मिनट तक माउंट एवरेस्ट पर रहने के बाद शीतल नीचे उतरी.

शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल उसकी इस कामयाबी से बेहद खुश हैं. इतना ही नहीं पूरा गांव और प्रदेश उसकी इस उपलब्धि से फूले नहीं समा रहे. विश्व की पहली महिला चंद्रप्रभा ऐतवाल को आदर्श मानने वाली शीतल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता सपना देवी को देती हैं.

शीतल 5 अप्रैल को काठमांडू से एवरेस्ट के बेस कैंप के लिए रवाना हुईं थीं. वो 15 अप्रैल को बेस कैंप पहुंची. उन्होंने 12 मई तक बेस कैंप में दूसरे पर्वतारोहियों के साथ रॉक क्लाइबिंग का अभ्यास भी किया था. उन्होंने ट्रेनिंग के लिए कुमाऊं की पंचाचूली पर्वत श्रंखला (धारचूला) को चुना था.

2017 में शीतल ने दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा को महज 22 साल की उम्र में फहत कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. शीतल कंचनजंगा के साथ ही बाकी सभी चोटियों को फतह कर चुकी हैं. दुनिया की तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत कंचनजंघा में फतह करने वाली दुनिया की सबसे युवा पर्वतारोही के रूप में भी शीतल का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है

शीतल ने साल 2014 में एनसीसी ज्वाइन की थी. इस दौरान ही उन्होंने माउंटनेयरिंग की बेसिक शिक्षा ली थी.