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Pm Modi And Yogi

लोकसभा चुनाव के लिए सातवें और अंतिम चरण में 13 सीटों पर 19 मई को मतदान होना है. इस चरण में पीएम मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला होना है.

अंतिम चरण के मतदान में यूपी की सात सीटों पर वोटिंह होगी. 2014 में इन सभी सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था. इस चरण में एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी पर लोगों की नजरें टिकी हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा भी गोरखपुर में दांव पर लगी है.

वाराणसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी के चलते इस सीट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं. यहां से पहले प्रियंका गांधी के कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की बात चल रही थी, लेकिन बाद में एक बार फिर से अजय राय को ही टिकट दे दिया गया.

इस सीट पर गठबंधन के उम्मीदवार को लेकर भी काफी खेल हुआ. गठबंधन की तरफ से पहले सपा नेता शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया था. लेकिन बाद में बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को अपना घोषित कर दिया था. लेकिन जब उनकी उम्मीदवारी रद्द हुई तो फिर से शालिनी यादव को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया.

गोरखपुर

इस संसदीय क्षेत्र को बाबा गोरक्षनाथ मंदिर से भी जोड़ कर देखा जाता है. बीते 25 सालों से इस सीट पर मंदिर का ही प्रतिनिधित्व रहा है. वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार पांच बार सांसद रह चुके हैं. योगी के गढ़ में उपचुनाव में सपा-बसपा के गठजोड़ ने सेंध मार दी थी. और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था.

गठबंधन से चुनाव जीते प्रवीण निषाद ने अब पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया है. पार्टी ने इस बार उन्हें संत कबीर नगर से टिकट दिया है. वहीं गोरखपुर सीट से भोजपुरी सुपरस्टार रविकिशन को मैदान में उतारा गया है. गठबंधन ने जहां रामभुआल निषाद को टिकट दिया है, तो मधूसूदन त्रिपाठी को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय कर दिया है.

गाजीपुर

गाजीपुर सीट से बीजेपी के कद्दावर नेता और मोदी सरकार में संचार व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा मैदान में हैं. इस सीट पर गठबंधन की ओर से बीएसपी नेता बाहुबली अफजाल अंसारी को टिकट दिया गया है. तो कांग्रेस गठबंधन की ओर से अजीत कुशवाहा को टिकट मिला है.

अपने क्षेत्र में व्यापक विकास कराने के बाद भी मनोज सिन्हा इस बार जातिवादी चक्रव्यूह में फंसे नजर आ रहे हैं.

चंदौली 

चंदौली से बीजेपी अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को एक बार फिर से मौका दिया गया है. नारस जिले की दो विधानसभाओं को शामिल कर बने इस संसदीय क्षेत्र से गठबंधन की ओर से एसपी नेता संजय चौहान को उतारा है, वहीं कांग्रेस से पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या कुशवाहा उम्मीदवार हैं.

2014 में यदि एसपी-बीएसपी उम्मीदवारों को मिले वोटों को मिला दिया जाता तो महेंद्रनाथ पांडेय हार जाते. अब यही बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता की वजह है.

हालांकि गठबंधन के भीतर मची अंतरकलह से उन्हें ताकत मिल रही हैं.

कुशीनगर 

बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली इस सीट में लड़ाई दिलचस्प है. बीजेपी ने मौजूदा सांसद राजेश पांडेय का टिकट काटकर विजय दुबे को उम्मीदवार बनाया है. तो कांग्रेस ने यूपीए सरकार में मंत्री रहे आरपीएन सिंह मैदान में उतारा है. गठबंधन की ओर से एसपी नेता नथुनी प्रसाद कुशवाहा इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं.

देवरिया

2014 में इस सीट से सीट 2014 में कलराज मिश्र ने जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार वे चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. इस बार सीट पर इस बार मुकाबला बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी और गठबंधन उम्मीदवार बीएसपी नेता विनोद जायसवाल के बीच है. कांग्र्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार नियाज अहमद को टिकट देकर बीजेपी की राह आसान कर दी है.

बलिया

इस सीट से बीजेपी ने पहली बार जीत दिलाने वाले सांसद भरत सिंह का टिकट काट कर भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त पर दांव लगाया है. गठबंधन ने ब्राह्मण नेता सनातन पांडेय को उतारकर सवर्णों के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है.

2014 में यहां से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर चुनाव हार गए थे.

मीरजापुर 

मिरजापुर से केंद्रीय मंत्री और अपना दल की उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल की साख दांव पर लगी है. गठबंधन ने बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल होने वाले रामचरित्र निषाद को उतारा है, तो कांग्रेस ने फिर ललितेश त्रिपाठी पर दांव लगाया है. मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है.