NCP नेता डीपी त्रिपाठी का कल दोपहर 02:30 बजे होगा अंतिम संस्कार

NCP Leader DP Tripathi | Hindi News
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  • (DP Tripathi) का शुक्रवार सुबह दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर सुबह सवा नौ बजे निधन हो गया
  • वे 67 साल के थे और गले के कैंसर से पीड़ित थे. त्रिपाठी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को अपराह्न ढाई बजे लोधी रोड शवदाह गृह में किया जाएगा  

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के महासचिव वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य देवी प्रसाद त्रिपाठी ( DP Tripathi ) का शुक्रवार सुबह दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर सुबह सवा नौ बजे निधन हो गया. 

वे 67 साल के थे और गले के कैंसर से पीड़ित थे. त्रिपाठी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को अपराह्न ढाई बजे लोधी रोड शवदाह गृह में किया जाएगा. उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं. 4-5 सालों से गले के कैंसर का इलाज चल रहा था.

डीपी त्रिपाठी के निधन पर NCP प्रमुख शरद पवार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके जाने से पार्टी में एक शून्यता आ गई है. पार्टी ने आज एक सशक्त आवाज को खो दिया है. उन्होंने कहा त्रिपाठी जी राजनीति में विद्वता, बौद्धिकता तथा परिश्रम का एक आदर्श मिश्रण थे. प्रवक्ता तथा महासचिव के रूप में एक सशक्त आवाज बनकर वह हमारी पार्टी के पैरोकार थे.

राकांपा की लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने भी त्रिपाठी के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि डी पी त्रिपाठी के निधन की खबर सुनकर वह बहुत आहत हैं. वह पार्टी महासचिव ही नहीं हम सबके मार्गदर्शक और सलाहकार भी थें. स्थापना काल से ही पार्टी को दिशा देते रहे हैं. उनके योगदान को भूलाया नहीं जा सकता है. भगवान उनकी आत्मा को शांति है और इस धुख की घड़ी में परिवार को बल दे.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव सीताराम येचुरी ने त्रिपाठी को कॉमरेड, सहपाठी और सहयात्री बताते हुए कहा कि डी पी त्रिपाठी, कॉमरेड, सहपाठी, सहयात्री के साथ ही और भी बहुत कुछ थें. विश्वविद्यालय से अब तक हमनें बातें की, बहस की, असहमतियां जाहिर कीं और एक साथ बहुत कुछ सीखा. 

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 29 नवम्बर 1952 को जन्मे डीपी  त्रिपाठी वाम छात्र राजनीति से चमके थे.1968 में राजनीति में आए डीपी त्रिपाठी को संसद के अच्छे वक्ताओं में शुमार किया जाता था. आपातकाल में आंदोलन के चलते वह जेल भी गए. साहित्य और संस्कृति में उनकी गहरी दिलचस्पी थी. 

त्रिपाठी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे. बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सलाहकार के रुप में लम्बे समय तक काम किया. सोनिया गांधी के विदेशी मूल के कारण वह 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. वह राज्यसभा के सदस्य चुने गये और एक पत्रिका थिंक टैंक के संपादक भी रहे.

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हिन्दुस्थान समाचार/गोविन्द