देश में धारा-377 की लड़ाई लड़ने वाली दो वकील खुद हैं कपल

सुप्रीम कोर्ट में सेक्शन 377 के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली वकील अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी ने हाल ही में एक खुलासा किया है. दोनों ने पहली बार एक इंटरव्यू में अपने निजी संबधों को सावर्जनिक तौर पर स्वीकार कर लिया है. ऐसा पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट की दो नामी महिला वकीलों ने निजी संबधों को सावर्जनिक तौर पर स्वीकारा.

इस इंटरव्यू के बाद अरुंधति काटजू ने ट्विटर पर मेनका के साथ एक फोटो भी शेयर की थी.

बता दें कि 2017 में मेनका गुरुस्वामी की एक तस्वीर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के रोड्स हाउस, मिलनर हॉल में लगाई गई थी. इस गौरव को हासिल करने वाली मेनका पहली भारतीय महिला और पहली रोड्स स्कॉलर बनीं थी.

सुप्रीम कोर्ट होमोसेक्सुमअल्टी को अपने एक फैसले में क्रिमिनल एक्ट करार दे चुका था, और इसी फैसले के खिलाफ क्यूकरिटिव पिटिशन दाखिल की गई थी. ये मामला बेहद चर्चित रहा है और विवाद का विषय भी रहा है पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने पिछले साल 6 सितंबर को समलैंगिकता को अपराध बतानेवाली धारा खत्म कर दी थी. इसके बाद अब समलैंगिकता अपराध नहीं माना जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पहले ब्रिटिश हुकूमत में बने कानून को भी खत्म कर दिया, जिसमें समलैंगिकों के बीच आपसी सहमति से होने वाले सेक्स को भी अपराध की श्रेणी में माना जाता था. बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंगटन नरीमन, डीवाई चंद्रचूड़, एएम खानविलकर और इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने एकमत होकर ये फैसला सुनाया था.

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