जानिए जगन्नाथ मंदिर के 8 हैरान करने वाले रहस्य

(फाईल फोटो)
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on whatsapp
WhatsApp

भगवान कृष्ण को ही भगवान जगन्नाथ कहा जाता हैं. भगवान कृष्ण पुरी के जगन्नाथ मंदिर में अपने भाई बलराम और अपनी बहन के साथ विराजमान हैं. यह मंदिर बहुत विशाल है. ये 4 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है. और इसकी उंचाई लगभग 214 फुट है. मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है. मंदिर से अगर उपर की ओर देखें तो ऐसा लगता है जैसे आकाश और मंदिर के चोटी का मिलन हो रहा हो.

भगवान जगन्नाथ से जुड़े अद्भुत रहस्य

पहला राज हवा के विपरीत लहराता ध्वजभगवान जगन्नाथ के मंदिर के उपर एक विशाल ध्वज लहराता है. यह बहुत रहस्मयी है. यह ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है.यानि हवा पूर्व से पश्चिम की ओर बह रही है तो यह पूर्व की ओर लहराएगा.

सुदर्शन चक्र

मंदिर के उपर एक सुदर्शन चक्र लगा है. ऐसा कहा जाता है कि आप पुरी में कहीं भी खड़े हो आप इस चक्र को देख पाएंगे. इस चक्र की बनावट इतनी अद्भूत है कि आप किसी भी दिशा से इसे देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि ये बिल्कुल आपके सामने है बता दें कि यह अष्टधातु से बना है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है

हवा की दिशा

आम दिनों के समय समुंद्री तट पर हवा समुंद्र से जमीन की ओर आती है लेकिन शाम के दौरान इसके विपरीत होता है लेकिन पुरी में इसका उलटा होता है यहां हवा जमीन से समुंद्र की ओर जाती है.

जगन्नाथ मंदिर दुनिया का सबसे उंचा और भव्य मंदिर है. ये मंदिर 4 लाख वर्ग फुट में फैला है. और इसकी उंचाई लगभग 214 फुट है..मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है.और इसकी छाया में एक गहरा राज छिपा है क्योंकि इस गुबंध की छाया हमेशा अदृश्य रहती है.

गुंबद के उपर नहीं उड़ते पक्षी

गुंबद के उपर आजतक किसी ने पक्षी को उड़ता हुआ नहीं देखा.

दुनिया का सबसे बड़ा रसोई घर

यहां 500 रसोईंये 300 सहयोगियों के साथ भगवान जगन्नाथ का प्रसाद मनाते है .यहां लगभग 20 लाख लोग भोजन कर सकते हैं.

मंदिर के अंदर सुनाई नहीं देती लहरों की आवाज

मंदिर के अंदर आप जैसे ही पैर रखेंगे. आपको समुंद्र की आवाज सुनाई नहीं देगी लेकिन आप जैसे ही मंदिर के बाहर पैर रखेंगे आपको समुंद्र की आवाज सुनाई देगी

स्वर्ग द्वार राज

मंदिर के बाहर स्वर्ग द्वार है. उस जगह शवों को जलाया जाता है. इसकी खास बात ये कि शवों की गंद जब आप मंदिर से बाहर आएंगे तभी आपको आएगी लेकिन जब आप मंदिर के अंदर जाएंगे उस समय आपको जरा भी महसूस नहीं होगी कि यहां शव जलाएं जाते हैं