दूसरा अवसर भी सेवा भाव का

जितेन्द्र तिवारी

गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है ‘प्रभुता पाई काई मद नाही’ अर्थात सत्ता प्राप्त होने पर किस को घमंड नहीं होता, लेकिन इस बार नरेन्द्र मोदी के पास सत्ता जब आई है तो समर्पण का भाव लेकर आई है. 

चुनाव परिणाम के बाद नरेन्द्र मोदी पहले से अधिक सौम्य, धीर-गंभीर और समर्पित मन भाव के हो गए हैं. चुनाव परिणाम से अभिभूत हुए बिना उन्होंने विनम्रता का परिचय ज्यादा दिया. 

सबसे पहले अमित शाह के साथ भाजपा के प्राण-प्रतिष्ठापक लालकृष्ण आडवाणी के घर जाकर उनके चरण छुए. स्वीकार भी किया कि आज जो भी सफलता मिली है, उसका श्रेय आडवाणी जी को ही जाता है. 

मोदी-शाह की जोड़ी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी के घर भी पहुंची. उनका चरणस्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया. अब तक रूष्ट समझे जाने वाले डॉ. जोशी ने हर्षित मन से यह ऐलान किया कि भाजपा ने जो पेड़ लगाया था, अब वह फल देने लगा है.

 25 मई की शाम भाजपा के लिए ऐतिहासिक शाम थी. संसद के सेंट्रल हॉल में 350 से अधिक सांसदों के साथ राजग के घटक दल और उसके प्रमुख नरेन्द्र मोदी को अपना नेता चुनने के लिए उपस्थित थे. 

सामने मंच पर संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता विराजमान थे. सबसे अनुभवी व बुजुर्ग नेता प्रकाश सिंह बादल के साथ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीस्वामी, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा भी थे. 

लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान भी मंच पर विराजमान थे. भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र सिंह तोमर ने नरेन्द्र मोदी को भाजपा संसदीय दल के नेता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता के तौर पर सर्वसम्मति से चुने जाने की प्रक्रिया पूरी कराई. 

इस दौरान सेंट्रल हॉल तालियों और मोदी-मोदी के नारों से कई बार गूंजा. 2014 में जब नरेन्द्र मोदी पहली बार संसद की सीढ़ियों तक पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले संसद भवन को नमन किया. 

इस बार मोदी ने वही श्रद्धा, वही समर्पण भारत के संविधान के प्रति व्यक्त किया. फिर शुरू हुआ नरेन्द्र मोदी का वह भाषण जिसमें उत्साह के साथ-साथ जिम्मेदारियों का अहसास था. 

सत्ता प्राप्ति पर खुशी से ज्यादा सत्ता गरीबोन्मुखी हो, इसलिए सतर्कता पर ज्यादा बात की. मोदी ने भाषण के शुरुआत में ही कहा- पूरी दुनिया में जीत का उत्सव मनाया गया. 

नई ऊर्जा-नई उमंग के साथ आगे बढ़ना है. इस उत्सव मनाने वाले सभी का अभिनंदन करता हूं. 2014 में जब नरेन्द्र मोदी पहली बार संसद की सीढ़ियों तक पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले संसद भवन को नमन किया. 

इस बार मोदी ने वही श्रद्धा, वही समर्पण भारत के संविधान के प्रति व्यक्त किया. फिर शुरू हुआ नरेन्द्र मोदी का वह भाषण जिसमें उत्साह के साथ-साथ जिम्मेदारियों का अहसास था. 

सत्ता प्राप्ति पर खुशी से ज्यादा सत्ता गरीबोन्मुखी हो, इसलिए सतर्कता पर ज्यादा बात की. मोदी ने भाषण के शुरुआत में ही कहा- पूरी दुनिया में जीत का उत्सव मनाया गया. नई ऊर्जा-नई उमंग के साथ आगे बढ़ना है. इस उत्सव मनाने वाले सभी का अभिनंदन करता हूं. 

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 1-15 जून के अंक में…

3 thoughts on “दूसरा अवसर भी सेवा भाव का”

  1. Pingback: engagement rings

Leave a Comment

%d bloggers like this: