सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की मुकदमों की पिक एंड पॉलिसी पर सवाल उठाने वाली याचिका

नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.). सुप्रीम कोर्ट सामान्य वकीलों की तुलना में बड़े और प्रभावशाली वकीलों के मुकदमों को प्राथमिकता से सुनवाई के लिए लगाने के आरोप वाली याचिका खारिज कर दिया है.

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता और वकील रीपक कंसल पर सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया. पिछली 19 जून को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

पिछली 19 जून को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि रजिस्ट्री का स्टाफ वकीलों की सहूलियत के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहा है. कुछ लोग उन पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं. याचिकाकर्ता वकील रीपक कंसल का कहना था कि उन्होंने एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड की याचिका दाखिल की जो सुनवाई के लिए नहीं लगी. दूसरों की याचिका सुनवाई की सूची में आ गई. रजिस्ट्री को आदेश दिया जाए कि सभी वकीलों से समान बर्ताव हो.

रीपक कंसल ने केसों की लिस्टिंग को लेकर रजिस्ट्री की ओर से किए जा रहे भेदभाव को लेकर एक पत्र लिखा था. उन्होंने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी की ओर से दाखिल किए गए केस की लिस्टिंग का हवाला दिया है. कंसल ने सेक्रेटरी जनरल को रजिस्ट्री के पिक एंड चूज की नीति के खिलाफ कदम उठाने की मांग की है.

रीपक कंसल ने कहा था कि अर्णब गोस्वामी ने 23 अप्रैल की रात आठ बजे के बाद केस दायर किया. लेकिन उसकी लिस्टिंग 24 अप्रैल की सुबह सुनवाई के लिए हो गई. पत्र में कहा गया था कि अगले दिन सुबह ही इस मामले की लिस्टिंग बिना केस में कोई दोष बताए ही हो गई जबकि इस केस के पहले के लंबित मामलों की अनदेखी की गई. रीपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पर कुछ खास वकीलों और लॉ फर्म के मामलों को लिस्ट करने में पक्षपात करने का आरोप लगाया था.

रीपक कंसल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने जब शॉर्ट कैटेगरी मैटर्स का प्रकाशित किया था तब अर्णब गोस्वामी के केस के संबंध में कोई कैटेगरी नहीं बताई गई थी. उसके बावजूद इस मामले की लिस्टिंग कुछ घंटों के भीतर हो गई. कंसल ने कहा था कि उन्होंने 17 अप्रैल को एक केस दायर किया था जिसकी लिस्टिंग नहीं हुई. इसे लेकर उन्होंने कई शिकायत की लेकिन उसे लिस्ट नहीं की गई.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत/बच्चन

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