Maharashtra : इस तरह साइब क्राइम से अपने बच्चों को बचाएं

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  • पालघर जिले के सात सौ सीएससी सेंटर बच्चों को साइबर क्राइम से बचने के लिए कर रहे जागरूक

मुंबई. रोजाना इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. खासकर बच्चे इंटरनेट पर काफी वक्त बिताने लगे हैं. इसके साथ ही बच्चों के इंटरनेट पर साइबर क्राइम का शिकार होने का खतरा भी बढ़ गया है.

कुछ समय में साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं और साइबर क्राइम के कुछ मामलों में तो ब्लैकमेलिंग से तंग आकर बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली है. इसीलिए बच्चों को साइबर क्राइम के अपराधों से बचाने के लिए जिले के 700 सीएससी सेंटरों ने अनूठी शुरुवात की है.

हजारो स्कूली बच्चों के लिए साइबर एक्सपर्ट के जरिए खास ट्रेनिंग निशुल्क रूप से दी जा रही है. और उन्हें अपराधों से बचने के लिए कुछ खास टिप्स भी दिए जा रहे है. साइबर क्राइम से बच्चो को जागरूक करने के लिए ट्रेंनिग ऑनलाइन दी जा रही है. जिससे बच्चो को सीएससी सेंटरो तक आना जरूरी नही है. बच्चो को साइबर अपराध से बचाने के लिए पूरे देश के करीब तीन लाख सीएससी सेंटर साइबर सुरक्षा नामक कोर्स निशुल्क संचालित कर रहे है.

सायबर क्राइम से बच्चों को बचाने के दिए जा रहे सुझाव-

  • 1 सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फेंड रिक्वेस्ट कभी भी स्वीकार न करें. अनजान शख्स आपको बिजनेस, लॉटरी आदि का झांसा देकर ठगी का शिकार बना सकता है.
  • 2 किसी अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड व ई-मेल संबंधी जानकारी साझा न करें.
  • 3 सोशल साइट पर अपनी निजी तस्वीर डालने से बचना चाहिए. तस्वीरों का गलत तरीके से उपयोग किये जाने का खतरा रहता है.
  • 4 बदले की भावना के चलते दूसरों की आपत्तिजनक फोटो व सूचना पोस्ट करके खतरे में पड़ सकते हैं. यह अपराध है. इसलिए इसके प्रति सचेत रहे.

ऑनलाइन शिक्षा की शुरुआत के बाद और बढ़ा खतरा

कोरोना के खतरे को देखते हुए स्कूल बंद है. ऐसे में निजी और सरकारी स्कूल बच्चो के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर रहे है. और बच्चो के हाथ मे मोबाइल और लैपटॉप कई-कई घंटे रहते है.

साइबर एक्सपर्ट दीपेश बोथरा कहते है, कि ऐसे में साइबर क्राइम का खतरा बच्चो पर और बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि रोज-रोज भेजे जाने वाले गुड मॉर्निंग जैसे मैसेजेस में कई तरह के लिंक होते है. जिनको बिना जाने क्लिक करने पर आपका लैपटॉप या फोन जिसमे माता-पिता की नेट बैंकिंग की सुबिधाये होती है. उनके हैक होने की संभावना होती है. इसके लिए समय-समय पर साइबर अपराध के संबंध में बच्चो को जागरूक करना चाहिए.

बच्चों को साइबर अपराधों के खतरे से जागरूक किया जा रहा है. इस प्रयास से बच्चे खुद को भी किसी आपराधिक साजिश के शिकार होने से बचा सकेंगे. स्कूली शिक्षा के साथ-साथ साइबर शिक्षा भी जरूरी है.

हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र