जानिए फेक न्यूज के झांसे में कैसे आते हैं आप

सोशल मीडिया के भागते समय में यह तय कर पाना बेहद कठिन है कि कोई न्यूज फेक न्यूज है या नहीं. आजकल फेक न्यूज से सामना होना सबसे आम हो गया है.

यह जरूरी है कि फेक न्यूज को परखा जाए. बीना सोचे समझें और जांचे परखे कोई खबर फारवर्ड न करें. फेक न्यूज वैसी खबरें होती हैं जो बढ़ा चढ़ा कर लिखी गई होती हैं. इसके साथ ही फेक न्यूज को जांचने के लिए आप कई काम कर सकते हैं.

ऐसी खबरें होती हैं अधिक शेयर

– ऐसी खबरें जो भारत या देश की तरक्की पर फोकस रखती हैं

– ऐसी खबरें जो हिंदुत्व या किसी धर्म विशेष का बखान करती हैं

– साइबर क्राइम और साइबर ठगी से जुड़ी जानकारी देने वाली खबरों पर भी भरोसा न करें.

– सोशल मीडिया पर आए बीमारियों-संक्रमण के ब्योरे को लेकर भी आश्वस्त न हों. इसके सोर्स को जरूर जांचे.

– सेहतमंद जीवन के नुस्खे और उपायों को भी शेयर न करें. इससे कही की सेहत पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है.

– राजनीतिक हस्तियों और दलों के गुणगान और विपक्षी नेताओं पर वार से जुडी़ पोस्ट को भी साझा न करें.

आपको बता दें कि इस मामले पर अलग-अलग कदम उठाए गए हैं. जैसे व्हॅाट्सएप ने ऐसे मैसेज को फॅारवर्डेड टैग लगाना शुरू किया है. इसके साथ ही फास्ट फॅारवर्ड मैसेज को एक बार में पांच लोगों को ही भेजा जा सकता है.

यह करें

– पोस्ट की सत्यता आंकने के लिए गूगल और एएलटी न्यूज की मदद लें. गूगल पर जाकर आप इंफरमेशन और फोटोज की सत्यता को जांच सकते हैं.

यह न करें

– वो खबरें जो संवेदनशील संदेश दे रही है. ऐसी खबरों को फारवर्ड न करें.

– सामाजिक सौहार्द को खराब करने वाली और बिगाड़ने वाले संदेशों से दूर रहें. ऐसे संदेशों को कभी फारवर्ड न करें. इनसे समाज में नफरत का माहौल बनता है. इन्हें तुरंत फोन से डिलीट करें.

– मैसेज के सोर्स पर भी गौर करें. मैसेज किसने, किन हालातों में भेजा है. उसको ध्यान में रखकर ही किसी मैसेज पर रिएक्ट करें.

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