सावरकर ने स्वयं को जलाकर अंधकार भरे राष्ट्र में प्रकाश लाने के लिए जीवन लगा दिया : नड्डा

नई दिल्ली, 26 फरवरी (हि.स.). भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, महान क्रांतिकारी, चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता और दूरदर्शी वीर सावरकर के विषय में जो कुछ भी बोला जाए, वह कम ही होगा.

वह स्वयं में आदर्श और क्रांति थे. वह स्वयं में आदर्श और क्रांति को समेट हुए थे और उन्होंने स्वयं को तिल-तिल जलाकर अंधकार भरे राष्ट्र में प्रकाश का लाने के लिए अपना जीवन लगा दिया.

नड्डा ने सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान द्वारा बुधवार को यहां आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय स्वातंत्र्यवीर सावरकर साहित्य सम्मेलन के तहत ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सावरकर के विचारों की महत्ता’ विषयक गोष्ठी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि सावरकर के साहित्य में भारत की पराधीनता का चित्रण है. जिसे बार-बार पढ़ा जाना चाहिए. भारत की भविष्य और वर्तमान चुनौतियों से निपटने में निश्चय ही उससे मदद मिल सकती है और वह हमें दृष्टि और दिशा दे सकती है.

वीर सावरकर तर्कपूर्ण और अर्थपूर्ण वैचारिक क्रांति के अग्रदूत थे. उन्होंने इतिहास के विशुद्ध अवलोकन को लिपिबद्ध कर अंग्रेजों की नींव हिला दी थी. उनकी पुस्तकें राष्ट्रप्रेमी क्रांतिकारियों के लिए धर्मग्रंथ होती हैं. वीर सावरकर विश्व भर में क्रांतिकारियों में अद्वितीय थे.

वह वो महान क्रांतिकारी थे जिसने ब्रिटिश गुलामी की बेड़ियों को न केवल ब्रिटेन में रहकर चुनौती दी, बल्कि स्वतंत्र समर को मंजिल तक पहुंचाने के लिए अभिनव भारत जैसे क्रांतिकारी संगठन के जरिए भारतीय युवा की आकांक्षाओं को विश्व में पहुंचाया. दो-दो आजीवन कारावास की सजा झेली. अपने भौतिक, पारिवारिक सुखों को त्याग दिया इस देश के लिए. सावरकर के संपूर्ण जीवन से हमें अनेकों ऐसे उदाहरण मिलते हैं जो सभी राष्ट्रप्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं.

उन्होंने अंडमान निकोबार के सेल्यूलर जेल में रहते हुए कैदियों पर हो रहे अमानवीय व्यवहार को उजागर किया. उस जेल में रहकर उन्होंने सामाजिक दर्शन का व्यवाहारिक रूप प्रस्तुत किया.

सभी प्रकार की कुरीतियों, छुआछूत, बालविवाह का विरोध किया और उसके खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने जेल की दीवारों पर दस हजार से ज्यादा पंक्तियों में कविताएं लिखीं जो आज हमारे महान साहित्य की धरोहर हैं. वह महान साहित्यकार थे. हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए 1906 से ही प्रयत्नशील थे.

हिन्दुस्थान समाचार/अजीत/प्रभात/बच्चन

Leave a Reply

%d bloggers like this: