बेगूसराय में दो हजार से अधिक जगहों पर होगी सरस्वती पूजा, 21 हजार तक की प्रतिमा

बेगूसराय, 18 जनवरी (हि.स.). मकर संक्रांति सम्पन्न होने के बाद अब विद्यादायनी मां सरस्वती पूजनोत्सव की तैयारी तेज हो गई है. बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा ना केवल विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती की उपासना का दिन होता है. नये काम को शुरू करने के लिहाज से भी इस दिन का बहुत शुभ माना गया है.

इस साल पंचमी तिथि 29 जनवरी को सुबह 10.45 बजे 30 जनवरी को दोपहर 1.19 बजे तक है लेकिन सूर्य के उदय-अस्त की मान्यता के हिसाब से सरस्वती पूजा 30 जनवरी को होगी तथा पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त 30 जनवरी को 10.45 से 12.37 बजे तक है.

बाजार गणतंत्र दिवस के लिए तिरंगे के साथ सरस्वती पूजा की सजावट की सामग्रियों से सज गया है. महज 11 दिन के बाद बसंत पंचमी है और उस दिन बेगूसराय जिले में दो हजार से अधिक जगहों पर प्रतिमा स्थापित कर सरस्वती पूजा की जाएगी, तो स्वाभाविक तौर पर प्रतिमा को अंतिम रूप देने का काम अंतिम दौर में है. यहां एक सौ से अधिक जगहों पर कलाकार प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं.

सबसे खास बात है कि बेगूसराय में बनाई गई प्रतिमा सिर्फ बेगूसराय ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी ले जाई जाती है. पूरे बिहार में प्रतिमा निर्माण के लिए चर्चित मंसूरचक में बड़े पैमाने पर प्रतिमा बन रही हैै तथा यह प्रतिमा बेगूसराय के विभिन्न हिस्सों के अलावा समस्तीपुर, पूर्णिया, भागलपुर, कटिहार, खगड़िया एवं सहरसा तक ले जाई जाती है. मंसूरचक में डेढ़ हजार से लेकर 21 हजार रुपये तक की प्रतिमा बनाई गई है.

मूर्तिकार देवी सरस्वती यहां प्रतिमा निर्माण में सपरिवार कड़ी मेहनत और लगन से जुटे हुए है. मंसूरचक के समसा बलान नदी के किनारे स्थित कुम्हार टोला एवं समसा बैंक बाजार के पास इस कड़ाके की ठंड में भी छोटे बड़े एवं विशालकाय प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे है.

प्रतिमा बनाने में जुटे लालबाबू पंडित ने बताया कि मूर्ति बनाना उनका पुश्तैनी पेशा है और वह अपने परिवार के साथ इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं. रामदेव पंडित ने बताया कि यहां की बनी हुई प्रतिमाओं की ख्याति दूर-दूर तक है. इसकी वजह से अन्य जिलों से भी खरीदार आ रहे हैं. इनसे होने वाली कमाई से ही इनके परिवार का गुजर बसर होता है.

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र

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