ऋषि कपूर के 3 आइकॉनिक कैरेक्टर्स, जो दिल में बस गए

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लजेंडरी एक्टर ऋषि कपूर ने 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. राज कपूर के बेटे और हिंदी सिनेमा के लजेंडरी एक्टर ऋषि कपूर ने अपने फिल्मों से न केवल लोगों को इंटरटेन किया बल्कि उन्हें एक नई सोच और बदलाव भी दिया.

ऋषि कपूर ने जब हिंदी सिनेमा में एंट्री की तो उनकी इमेज रोमांटिक हीरो के तौर पर बनी अगर यूं कहे कि उन्होंने ही हिंदी सिनेमा को बताया कि एक रोमांटिक हीरो कैसा होता तो गलत नहीं होगा.

70 के दौर में जहां अमिताभ बच्चन एक एक्शन हीरो के तौर पर बॉलीवुड में छाए हुए थे वहीं ऋषि कपूर ने उस दौर लोगों को रोमांस करना सिखाया. 70 के दशक की हाइस्ट ग्रॉसिंग फिल्म सोले थी वहीं 70 के दशक के दूसरी हाइएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बॉबी थी, ये बहुत दिलचस्प बात थी कि ऋषि कपूर की बॉबी ने फिल्म सोले को टक्कर दी.

इसके बाद चांदनी, प्रेम रोग, बोल राधा बोल, बहुत सारी रोमांटिक फिल्मों में ऋषि कपूर नजर आए..पिछले लंबे समय से वो सपोर्टिंग रोल में नजर आ रहे थे लेकिन सपोर्टिंग रोल में भी उन्होंने एक्टिग को एक अलग मुकाम दिया आइए आपको बताते है ऋषि कपूर के उन तीन आइकॉनिक कैरेक्टर्स के बारे में जिन्होंने लोगों को इंस्पायर किया.

अमरजीत कपूर

ये कैरेक्टर ऋषि कपूर के मोस्ट आइकॉनिक कैरेक्टर्स में से एक है. फिल्म कपूर एंड सन्सस सीनस 1921 में उन्होंने एक सीनियर सीटिजन का रोल प्ले किया था जिसका दिल बच्चे जैसा. वो अपनी सारी ख्वाहिशों को पूरा करना चाहता है. ये कैरेक्टर हम से कइयों को रिटार्यमेंट गोल्स के लिए इस्पांयर करता है. ये कैरेक्टर की खूबसूरती है कि ये आपको उम्र के आखिरी पड़ाव में भी जिंदादिल रहने के लिए मोटिव करता है.

बाबुलाल वेखरिया

27 साल बाद इस फिल्म में ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन साथ नजर आए. इस फिल्म में ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन दोनों के ही कैरेक्टर आइकॉनिक है. इन दोनों कैरेक्टर्स ने लोगो को जीने की उम्मीद थी. अक्सर वृद्धवास्था में लोग जीने की चाहत खो देते है, वो अपना समय सिर्फ अपने बच्चों के साथ काटते हैं. फिल्म में ऋषि कपूर ने 75 साल के बेटे का रोल प्ले किया जो डिस्पिलनी के साथ अपनी जिंदगी जीता है और अपने पिता यानी अमिताभ बच्चन के साथ रहता है जो खुश मिजाज किस्म के इंसान है और 102 साल के हैं. ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन के इन कैरेक्टर्स ने सिनेमा को नये रंग दिए

मुराद अली

ये फिल्म और कैरेक्टर वाक्या में एक आइकॉनिक कैरेक्टर है जिसने लोगों को एक नया नजरिया दिया. खास तौर पर उन लोगों को जो धर्म के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाते हैं. फिल्म में ऋषि कपूर ने मुराद अली का रोल प्ले किया था जो शांति से बनारस में अपने परिवार के साथ रहता था लेकिन उनके परिवार का एक सदस्य आतंकी गतिविधियों में पड़ जाता है जिसके बाद लोग उन्हें भी टैरिस्ट समझने लगते हैं. इस फिल्म में उनके साथ तापसी पन्नू नजर आई थी.