कैसे पकड़े गए थे निर्भया के दोषी..DELHI CRIME वेब सीरीज रिव्यू

आज के दौर में अगर कोई ये कहे कि वो आसमान में उड़ सकता है उस पर भी यकीन किया जा सकता है क्योंकि आज टेक्नॉलजी इतनी डेवलप हो चुकी है हर चीज पोसिबल लगती है. इंटरनेट के आने के बाद अब घर बैठे फैमिली मेंबर्स, फ्रेंडस से चैट, कॉल वीडियो चैट कर सकते है. लेकिन जहां इतना कुछ बदल रहा है वहां बहुत कुछ आज भी वैसा ही है.  

WOMEN EMPOWERMENT , WOMEN SECURITY की बात करने वालों को अक्सर ये बातें वुमन्स डे के दिन ही याद आती है या फिर तब जब फिर कोई मासूम यौन शोषण का शिकार होती है. साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भयाकांड के बाद बहुत कुछ बदला लेकिन बहुत कुछ आज भी वैसा ही है.

22 मार्च को नेटफ्लिक्स ने डेल्ही क्राइम बेस्ड वेब सीरीज लांच की. ये वेब सीरीज 7 एपिसोडस की है. फिल्म को भारतीय मूल के कनाडा के रहने वाले डायरेक्टर रिची मेहता ने डायरेक्ट किया है. इस वेब सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे उन 6 लोगों को पकड़ने के लिए जांच की गई थी.

जिन्होंने देश की राजधानी में चलती बस में 16 दिसंबर की रात 23 साल की फिजियोथेरेपी स्टूडेंट का रेप किया था.  13 दिन तक जंग लड़ने के बाद पीड़िता की सिंगापुर में मौत हो गई थी.

निर्भया कांड की जांच उस समय दिल्ली डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी ने की थी. जिनका किरदार वेब सीरीज में शेफाली शाह ने प्ले किया है. शेफाली शाह के अलावा आदिल हुसैन, रसिका दुग्गल, राजेश तेलंग और यशस्वी दाहिमा भी सीरीज में हैं. एक क्राइम वेब सीरीज में इमोनश को कैसे दिखाया जाना चाहिए. ये वेब सीरीज उस का बेस्ड एग्जामपल है. कई जगह डायलॉगस भी काफी स्ट्रांग है.

फिल्म के डायरेक्टर रिची मेहता ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस वेब सीरीज को बनाने के लिए 4 साल रिसर्च की. जिसके बाद 430 स्क्रिप्ट तैयार की गई. आपने अब तक जो निर्भया को लेकर जो एंगल देखें है ये वेब सीरीज उन सब से बिल्कुल हटकर है..

वेब सीरीज में उस समय की दिल्ली पुलिस के एक्शन, कंडीशन्स को दिखाया गया है. जो एक आम सीटिजन के लिए जानना बहुत जरुरी है. क्योंकि अक्सर हम किसी भी घटना के बाद सीधा पुलिस और प्रशासन पर अंगुली उठाते है. ऐसे में उस समय दिल्ली पुलिस के भीतर क्या चल रहा था ये जानना बहुत जरुरी है.  

वेब सीरीज का एक INTERESTING SEGMENT है इनवेस्टिगेशन का तरीका… अब तक बॉलीवुड और टीवी पर कई क्राइम और INVERSTIGATIVE शोज मूवीज आ चुकी है. लेकिन इस वेब सीरीज से आपको समझ आ जाएगा कि असल में किसी क्रिमिनल को पकड़ना इतना आसान नहीं होता जितना फिल्मों में दिखाया जाता है.

अक्सर आपने फिल्मों कॉल ट्रेजिंग के बारे में सुना होगा. फिल्मों में ये सब इतनी सरलता से दिखाया जाता है कि हर किसी को लगता है कि पुलिस के लिए कॉल ट्रेज करना बहुत आसान होता है. लेकिन असल में ऐसा नहीं होता.

किसी का भी कॉल ट्रेज करने के से पहले बहुत सारी फॉर्मेलिटीज पूरी की जाती है. और ट्रेज करने के बाद भी बहुत सारी बातों का ध्यान रखा जाता है. दिलचस्प बात ये है कि इस पूरे प्रोसेस को इस वेब सीरिज में बहुत अच्छे से दिखाया गया है जो इस वेब सीरीज रियलस्टिक बनता है.  

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