रेवती नक्षत्र नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण बनाएगा विश्व में और प्रभावशाली

लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष के एकादशी को रेवती नक्षत्र में शपथ ग्रपथ ग्रहण करेंगे. 30 मई को शाम सात बजे रेवती नक्षत्र का चतुर्थ चरण चल रहा होगा. दिन भी वृहष्पतिवार पड़ रहा है. एकादशी वैसे भी गुरु का ही दिन है.

इस नक्षत्र में शपथ के बाद नरेंद्र मोदी को और प्रभावशाली बनाएगा. इसके साथ ही पृथ्वी तत्व की राशि होने के कारण पूरे जगत में यश मिलेगा. शपथ के लग्न की राशि वृश्चिक है.

यह नक्षत्र ज्योतिष अनुसार मीठा व कोमल नक्षत्र है. रेवती अर्थात जन्म राशि अर्थात चंद्र रेवती मीन राशि में “जीटा पिसियम” नामक तारे का हिन्दू नाम है. भारतीय पार्श्वीय खगोल विज्ञान में इस तारे को मेष के प्रथम बिंदु के रूप में पहचाना जाता है

अर्थात जब सूर्य इस तारे को पार करते हैं, तब एक नया सौर वर्ष शुरू होता है. सन 572 तक ‘वसंत सम्पात’ का प्रारम्भ रेवती नक्षत्र से होता था. यह उस समय तक वसंत सम्पात से केवल 10 पश्चिम में था.

इस संबंध में गाजीपुर के ज्योतिषाचार्य मुनेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस नक्षत्र में शपथ ग्रहण करने के बाद जातक वफादार और कल्पनाशील, निडर और शक्तिशाली होंगे. समाज में 2022 में सफलता मिलेगी.

उस समय चार ग्रही योग बन रहा है. अनुकुल योग है, अनिवपयोग का निर्माण करता है. विशिष्ट क्षमता, प्रभावशाली, चुनाव में कोई टीस नहीं निकाल सकता है.

ज्याेतिषाचार्य मुनेंद्र उपाध्याय ने बताया कि नक्षत्र के चार पाद हैं. पहला पाद में माता पिता काे लोभ, दूसरे में धन, तीसरे राज समान, चतुर्थ में प्रभावशाली बनता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह रेवती नक्षत्र के चौथे चरण में हो रहा है.

इस कारण यह उन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाएगा. रेवती का स्वामी गुरू, राशि मीन है. आय के अनेक साधन रहेंगे. पृथ्वा तत्व की राशि होने के कारण यश पाएंगे.

योग कुल 27 हैं. सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं है. इस क्रम में 25 वें नम्बर पर आने वाला नभस योग शपथ ग्रहण के समय बन रहा है. इस योग में शपथ ग्रहण करने पर चारों तरफ जातक की प्रशंसा होती है. यह योग करुणा, सहिष्णुता प्रदान करता है.

इससे उनको सम्मान प्रदान कराने के साथ ही उन्हें यह दयावान और सहिष्णु बनाएगा. इसके साथ ही अनिवाह उप योग बन रहा है, जिसमें प्रबंध निदेशक की भूमिका में जातक अव्वल होता है.

प्रयागराज के ज्याेतिषाचार्य श्रीनिवास ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह के समय रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चंद्र गति करते रहेंगे, जो लग्न के पांचवें में होने के कारण जनप्रियता तथा रचनात्मक जनप्रियता तथा रचनात्मक कार्यक्रम की ओर इशारा करते हैं.

उन्होंने बताया कि उस समय की लग्न कुंडली बनाने पर उस समय वृश्चिक लग्न में होनी है,जो की स्थिर राशि है और मंगल जिसका स्वामी है. यह राजकीय कार्यों व शक्तिपूर्ण कार्यों की राशि होती है. स्वयं नरेंद्र मोदी की कुंडली भी वृश्चिक लग्न की ही है तो यह दोनों में अद्भुत साम्य है.

इससे साफ़ है की नयी सरकार पर निष्कंटक रूप से मोदी का ही प्रभाव रहेगा तथा इसके साथ-2 रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चंद्र गति करते रहेंगे जो की लग्न से पाँचवें होने से जनप्रियता तथा रचनात्मक कार्यक्रम की ओर इशारा करते हैं.

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त जो इस शपथ लग्न की सर्वाधिक ख़ास बात है कि वृश्चिक लग्न केंद्र में ही वृहस्पति स्थित हैं तथा सातवें केंद्र में सूर्य से सीधे दृष्टि व राजयोग बना रहे हैं यह दशम व पंचम का योग और भी ख़ासियत लिए हुए इसलिए भी रहेगा, क्योंकि पाँचवें में मीन राशि के चंद्र पर बृहस्पति की दृष्टि भी रहेगी.

इसका अर्थ है कि पूरे कार्यकाल में जनकल्यान,धार्मिक नैतिकता और उच्च प्रशासनिक मापदंडों पर कार्य होगा। दूसरी बात अच्छी नीयत से यह सरकार सबके साथ न्याय करेगी.

वैसे दूसरे भाव में स्थित शनि केतु व आठवें मंगल राहु कमज़ोर करने व बांधा पहुँचाने की कोशिश भी लोगों को करते दिखेंगे परंतु फिर भी औसत से बेहतर सरकार प्रदर्शन रहने के योग है.

इस संबंध में ज्याेतिषाचार्य केशव प्रसाद राय ने बताया कि उस समय सौभाग्य योग भी बन रहा है. इसमें उनकी प्रतिभा को बढ़ाएगा. विश्व गुरु बनाएगा. शपथ ग्रहण के वक़्त बुध की महदशा में बृहस्पति की अंतर्दशा व सूर्य व चंद की सूक्ष्म तथा प्राणदशा रहेगी.

जो की दर्शाती है कि समय परिस्थितियों का भी सहयोग इस सरकार को मिलेगा, जिससे ख़ासतौर पर अर्थव्यवस्था,शिक्षा, नारीजगत से जुड़े मुद्दों व विषयों में बड़ी सफलता मिलेगी. 2021-22 में पार्टी व सरकार में घरेलू कलह हो सकता है.

हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/राजेश