Republic Day 2020: 26 जनवरी से कैसे अलग होता है 15 अगस्त का ध्वजारोहण, पढ़िए पूरी खबर

नई दिल्ली. किसी भी देश का राष्ट्रध्वज उसकी पहचान होता है.. उसकी शान बरकरार रखने के लिए हर भारतीय बलिदान देने को तैयार रहता है… देश के राष्ट्रीय पर्व पर तिंरगा फहराने का रिवाज है और संविधान के मुताबिक देश में कोई भी व्यक्ति कभी भी, कहीं भी बिना किसी दबाव के तिंहगा फहरा सकता है.

भारत की आजादी और इसकी अखंडता को बरकरार रखने के लिए बहुत से लोगों ने बलिदान देकर तिरंगे का सम्मान बरकरार रखा…. देश की आजादी का जश्न मनाते हुए इस दिन देश के प्रधानमंत्री लालकिले से ध्वजारोहण करते हैं और फिर लोगों को संबोधित भी करते हैं. ..

लेकिन 15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा फहराने में कुछ फर्क होता है.. 26 जनवरी और 15 अगस्त दोनों ही राष्ट्रीय पर्व हैं. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस कहा जाता है और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस कहा जाता है..

वैसे झंडा 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन भी फहराया जाता है लेकिन ये स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले ध्वजारोहण से अलग होता है. इसके अलावा इन दोनों अहम दिनों को मनाए जाने के तरीके में भी काफी अंतर होता है.. आइए आपको ऐसे ही 3 बड़े फर्क के बारे में बताते हैं… क्या है वो अंतर, आइए हम आपको बताते हैं.

पहला अंतर
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींचकर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोलकर फहराया जाता है, जिसे ध्वजारोहण कहा जाता है, क्योंकि ये 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है, उस समय प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है.

जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोलकर फहराया जाता है, संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है.

दूसरा अंतर
15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं, वे ध्वजारोहण करते हैं क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना संदेश राष्ट्र के नाम देते हैं। जबकि 26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं.

तीसरा अंतर
स्वतंत्रता दिवस के दिन लालकिले से ध्वजारोहण किया जाता है। जबकि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है.

चौथा अंतर
पूरे भारत में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। जबकि गणतंत्र दिवस के मुकाबले स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा कुछ नहीं होता।

पांचवां अंतर
गणतंत्र दिवस पर देश अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विलक्षणता को दिखाता है। जबकि स्वतंत्रता दिवस के दिन ऐसा कुछ नहीं होता।

छठा अंतर
26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन समारोह में मुख्य अतिथि आते हैं। जबकि स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा नहीं होता है।

सातवां अंतर
26 जनवरी और 15 अगस्त दोनों ही राष्ट्रीय पर्व हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस कहा जाता है और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस कहा जाता है।

भारतीय इतिहास में इस दिन देश का संविधान लागू हुआ था.. जो दुनिया के सभी संविधानों में सबसे बड़ा संविधान है.. भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है..

भारतीय संविधान इस वक्त 465 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 22 भागों में बंटा हुआ है…. इस संविधान को बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे…. बाबासाहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर ने ही भारत का संविधान लिखा था और उन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है..

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