जीतेगा गाजीपुर

ब्रजेश कुमार

मैं गाजीपुर के विकास के साथ हूं. यही नारा इन दिनों गाजीपुर में सुनाई दे रहा है. यहां विकास का वेग जातीय चक्रव्यूह पर भारी है. लोग मुखर हैं.

वे विकास की बयार में झूम रहे हैं. सच तो यह है कि मनोज सिन्हा के विकास कार्य ने गाजीपुर में जनआकांक्षा को जगा दिया है. अब यहां के लोग आपराधिक राजनीति के भयावह दौर में नहीं लौटना चाहते हैं.

बातचीत के दौरान गाजीपुर के लोग जो कुछ बोल रहे हैं, उसका लब्बोलुआब यही है. इससे एक सवाल खड़ा होता है कि आखिर वे ऐसा क्यों बोल रहे हैं? यह पूछने पर वे लोग साफ-साफ कहते हैं, ‘यहां महागठबंधन के उम्मीदवार से आशंका पैदा हो गई है.

आखिर महागठबंधन के नेता क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या हमारे बच्चे फिर से अपराध की दुनिया में पले और बड़े होंगे?’ दरअसल, गाजीपुर की सीट पर महागठबंधन ने अफजाल अंसारी को मैदान में उतारा है.

आम लोगों में अफजाल की छवि बाहुबली की है. 14वीं लोकसभा में यहां के लोगों ने अफजाल अंसारी को ही अपना प्रतिनिधि चुना था. उसका फल वे लोग अगले पांच सालों तक भुगतते रहे.

उस गलती से सबक लेकर गाजीपुर के लोगों ने मन बदला. सोच-विचार के बाद 16वीं लोकसभा में मनोज सिन्हा को अपना सांसद चुना. उससे गाजीपुर की आबो-हवा बदली है.

रामचरण कहते हैं, ‘पहले गाजीपुर का रेलवे स्टेशन अंधेरे में ठीक से दिखाई नहीं देता था. अब देखिए! हर तरफ दूधिया रोशनी फैली है. स्टेशन पर तेज गति वाला गाजीपुर जीतेगा वाई-फाई चल रहा है.’

नाम जाहिर न करते हुए जंगीपुर के एक नागरिक ने बताया, ‘यहां का हर आदमी विकास का स्वाद चख चुका है. अब कोई भटकने वाला नहीं है.’ एक सवाल के जवाब पर ठेठ गंवई अंदाज में उसी नागरिक ने साफ कहा, ‘नाम क्या पूछते हैं!

यहां सब कोई मोदी और मनोज सिन्हा का फैन (प्रशंसक) है.’ इन दिनों जैसा दृश्य गाजीपुर में है, वह राजनीति में विरले ही दिखाई देगा. विचारधारा के स्तर पर भारतीय जनता पार्टी का विरोध करने वाले शशिधर कहते हैं, ‘देखिए, हमारे वैचारिक मतभेद तो हैं.

लेकिन, सच यही है कि गाजीपुर में विकास के कार्य बहुत हुए हैं.’ आज की राजनीति में क्या इसे साधारण बात कहेंगे कि वैचारिक मतभेद रखने वाले भी विकास कार्य की सराहना करें! गाजीपुर में वह दृश्य दिखाई दे रहा है.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 1-15 मई के अंक में…

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