RBI ने खारिज किया मर्जर का प्रस्ताव, नहीं होगा इस बैंक का विलय

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक में शुमार लक्ष्मी विलास बैंक को एक जोरदार झटका दिया है. दरअसल आरबीआई ने दोनों के विलय प्रस्ताव पर रोक लगा दी है.

इन दोनों ने अप्रैल में विलय का ऐलान किया था. लेकिन अब न सिर्फ आरबीआई ने इस विलय पर रोक लगा दी है. बल्कि इसके विलय प्रस्ताव को भी कैंसिल कर दिया है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बुधवार को इस विलय के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. बैंक ने सात मई 2019 को प्रस्तावित विलय के बारे में आरबीआई से मंजूरी मांगी थी.

बैंक ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा, RBI ने नौ अक्टूबर 2019 को अपने पत्र के माध्यम से यह बताया कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. और इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट लि. का लक्ष्मी विकास बैंक (एलवीबी) के साथ विलय के आवेदन को मंजूरी नहीं दी जा सकती.

आरबीआई ने वैसे तो कई वजहों के कारण इस विलय को खारिज किया है. लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण ज्यादा एनपीए, जोखिम प्रबंधन के लिए पर्याप्त नकदी नहीं होने की वजहों को माना जा रहा है.

दो साल संपत्तियों पर नकारात्मक रिटर्न को देखते हुए बीते महीने आरबीआई ने लक्ष्मी विकास बैंक पर ये कार्रवाई की थी. पीसीए फ्रेमवर्क में डाले जाने का मतलब यह हुआ कि लक्ष्‍मी विलास बैंक न तो नए कर्ज दे सकता है और न ही नई ब्रांच खोल सकता है.

आपको बता दें कि लक्ष्मी विलास बैंक के निदेशकों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 790 करोड़ रुपये का गबन करने केआरोप में मुकदमा दर्ज किया था. यह मुकदमा पुलिस ने वित्तीय सेवा कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए किया है.जिस पर

अभी तक कर्रावाई चल रही है. इसी को देखते हुए आरबीआई ने विलय प्रस्ताव को खारिज किया है.
लक्ष्‍मी विलास बैंक 1926 में अस्तिाव में आया था. लेकिन आरबीआई ने इस बैं को लाइसेंसे में 1958 में दिया था. साल साल 1974 में बैंक ने अपने ब्रांचों का विस्‍तार करना शुरू किया था. लक्ष्‍मी विलास बैंक के ब्रांच और फाइनेंशियल सेंटर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल के अलावा दिल्‍ली, मुंबई और कोलकाता में भी मौजूद हैं.

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