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गोरखपुर. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर रवि किशन का दर्द छलक कर बाहर आ गया. वे इसे छिपा नहीं सके. कहा, ‘कांग्रेस ने हमें सम्मान नहीं दिया है. प्रियंका के कहने पर 2014 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा था. देश में मोदी लहर थी. सफलता नहीं मिली. कांग्रेस के स्थानीय लोगों का साथ नहीं मिला. हारने के बाद किसी ने हमें फोन करके हाल भी नहीं जाना. कांग्रेस से मोह भंग होना लाजिमी था.

प्रियंका और राहुल को पता चलेगा बीजेपी क्यों जीत रही है.

अब प्रियंका और राहुल को यह ठीक से समझ आयेगी कि बीजेपी क्यों जीत रही है?’ बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी गोरखपुर से भोजपुरी सिनेमा के कलाकार रविकिशन को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है. ये इस चुनाव में किसी भी दल से चुनौती नहीं मानते. क्षेत्र को योगी और बीजेपी का गढ़ बताते हुए रवि किशन ने कहा कि किसी भी दल का दावा प्रस्तुत करने तक से भी इत्तेफाक नहीं रखते. बीजेपी के काम के आधार पर जीत पक्की मान रहे हैं.

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2018 के उपचुनाव में योगी अपना गढ़ हारने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उपचुनाव का बुरा समय बीत गया है. लोग पश्चाताप कर रहे हैं. सोच बदली है. चुनाव हम ही जीतेंगे. लोगों ने मोदी को एक बार फिर से लाने की ठान ली है. गठबन्धन परास्त हो गया है.विकास के आगे जातीय गणित ध्वस्त है. सबको बुनियादी सुविधाएं मिली हैं. लोग दबा कर मोदी को जीताएंगे.

मोदी गरीबों की लड़ाई लड़ रहे हैं.

मोदी गरीबों की लड़ाई लड़ रहे हैं. 23 के परिणाम के बाद सबको पता चल जाएगा कि कौन कितने पानी में है. एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस और गठबन्ध का तो पता नही, लेकिन यूपी में 74 प्लस रहेगी. जाति के नाम पर चुनाव लड़ने वाले दल चुनाव बाद अपने कार्यालय का पता खोजेगें. बाहरी के सवाल पर कहा कि हम मामखोर के शुक्ल हैं. यहां से भावनात्मक लगाव है. विकास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे.

रील और रीयल लाइफ में फर्क है.

नेता अभिनेता के सवाल पर कहा कि ‘रील और रीयल लाइफ’ में फर्क है. रील लाइफ ‘काल्पनिक’ है. रीयल लाइफ में इमोशन है. वर्क है. यहां काम करने वाला टिकता है. लूटने वाले के दिन लद गये. जो लूटा गया है, उसे वापस लाना है. सपा-बसपा ने लूट कर अपनी इमारतें बनाईं हैं.

मातृभाषा भोजपुरी हमारी पहचान.

भोजपुरी में मतदाताओं के रिझाने के सवाल पर कहा कि यह हमारी मातृभाषा है. पहचान है. इसी भाषा में बोलेंगे भी और प्रचार भी करेंगे. जब पंजाबी आदमी, पंजाबी बोलता है, गुजराती, गुजराती बोलता है तो भोजपुरिया, भोजपुरी नहीं बोलेगा तो क्या फ्रेंच बोलेगा?

गिनाईं प्राथमिकताएं

जीता, तो गोरखपुर को रंगमंच का हब बनाने का प्रयास होगा. यूपी, बिहार, झारखण्ड जैसे राज्य इसमें समाहित किये जाएगें. पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौजवानों को रोजगार देंगे. मुंबई में भी भोजपुरी फिल्म उद्योग अच्छी कण्डीशन में है. हजारों को रोजगार मिला है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कला के माध्यम से रोजगार का रास्ता आसान होना चाहिए.


गोरखपुर में रामूजी राव जैसा स्टूडियो चाहिए. इस समय 50 से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग चल रही है. जिसे जगह नहीं मिल रही, वो रोड पर ही शूटिंग कर रहा है. एक आधुनिक स्टूडियो, पूर्वांचल के नवोदित कलाकारों का आश्रयगृह बनेगा. बजट के अभाव में भोजपुरी सिनेमा को वालीबुड के समांतर खड़ा करने में दिक्कतें आ रही हैं. हम जैसे कलाकारों को कोई अच्छा पद मिले तो भविष्य संवर सकता है. एक अन्य सवाल में जवाब में कहा कि भोजपुरी स्टार्स के बीजेपी की ओर आकर्षित होने का मुख्य कारण विकास और मोदी जी के काम करने की शैली है.

संसद में उठेगा भोजपुरी का मुद्दा.

भोजपुरी विकास और सिनेमा के विकास की लड़ाई पिछली 19 वर्षों से चल रही है. हम जीते तो निरहुआ और मनोज भाई के साथ मिलकर अपनी बात संसद में रखेगें. भोजपुरी को सम्मान दिलाने की भरपूर कोशिश होगी.

प्रसिद्धि बटोरने का कुत्सित प्रयास है कमल हसन का बयान

फिल्म अभिनेता कमल हसन के गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताने पर कहा कि इनके पास और कोई काम नहीं है. चुनाव के समय फालतू बयान देना प्रसिद्धी बटोरने का कुत्सित प्रयास है.

हिन्दुस्थान समाचार/आमोद/राजेश