प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला तो 21 के बाद बनाएंगे नया राजदः राणा

  • अभय सिंह को राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाने से बगावत पर उतरे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा
  • प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के फैसले पर ही सवाल उठा दिया है


रांची. युवा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष अभय कुमार सिंह को झाऱखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष बनाए जाने से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा बगावत पर उतर आये हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव नये प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के अपने निर्णय पर दोबारा विचार करते हुए अभय सिंह को नहीं हटाते हैं तो 21 जून के बाद प्रदेश में नये राजद की घोषणा की जाएगी. इस मसले पर पार्टी के 18 जिलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात हो चुकी है.

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के फैसले पर ही सवाल उठा दिया है. कहा, लालू प्रसाद अब पुराने लालू प्रसाद नहीं रहे। लालू संदेश देते थे कि अन्याय बर्दाश्त नहीं करो। आज लालू प्रसाद अपने आचरण के उलट हो गये हैं. इधर, अभय सिंह गुट का दावा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व उसके साथ हैं और झारखंड में राजद जल्द ही नये तेवर में दिखेगा.


युवा राष्ट्रीय जनता दल
(राजद) अध्यक्ष अभय कुमार सिंह को झाऱखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष बनाए जाने का विवाद अब चरम पर पहुंच गया है. झारखंड में राजद दो गुटों में बंट गया है. एक गुट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा का है तथा दूसरा नव मनोनीत अध्यक्ष अभय कुमार सिंह का है. दोनों गुटों में घमासान मचा है. एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हो रही है.

गौतम सागर राणा गुट का आरोप है कि युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अभय कुमार सिंह अैर उनके सहयोगियों का आचरण पार्टी विरोधी रहा है. पार्टी की अनुशासन समिति ने इस कृत्य के लिए अभय सिंह समेत तीन को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर रखा है. इसके बावजूद निष्कासन के एक पखवाड़े के अंदर बिना किसी पूर्व सूचना के प्रदेश की पुरानी कमेटी को भंग कर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना पार्टी की नीति और सिद्धांतों के विरुद्ध है.

लोकसभा चुनाव के समय प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी और गिरिनाथ सिंह ने छोड़ी थी पार्टी


झारखंड में अपनी जमीन तलाश रहे राजद के लिए यह बड़ा झटका है. लोकसभा चुनाव के दौरान ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह और प्रदेश राजद अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी ने राजद छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था. उसके बाद 25 मार्च को राणा को प्रदेश राजद की कमान सौंपी गई थी. इसके पहले भी वे राजद के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. 2014 में राज्य से राजद का सूपड़ा ही साफ हो गया था.

लोकसभा चुनाव के बाद अचानक राजद के प्रदेश अघ्यक्ष पद पर अभय कुमार सिंह की ताजपोशी कर दी गई. अभय सिंह इससे पहले प्रदेश युवा अध्यक्ष थे. उल्लेखनीय है कि अविभाजित बिहार में जहां झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों से राजद के नौ विधायक हुआ करते थे. 2004 में यह संख्या घटकर सात और 2009 में पांच रह गई और 2014 के विधान सभा चुनाव में राजद का खता भी नहीं खुला .


हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/विनय

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