पत्रकार मर्डर केस-मरते दम तक जेल में रहेगा दोषी राम रहीम

नई दिल्ली. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है. सीबीआई की विशेष कोर्ट ने ये सजा सुनाई है. इसके साथ ही राम रहीम पर 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है. राम रहीम के अलावा तीनों दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

सजा का ऐलान विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ. गुरमीत राम रहीम तथा तीन अन्य को इस मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया था.

16 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने मर्डर केस में 11 जनवरी को राम रहीम, कृष्ण लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह को दोषी करार दिया.

क्या है पूरा मामला
साल 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. रामचंद्र छत्रपति लगातार अपने समाचार पत्र में डेरे में होने वाले अनर्थ से जुड़ी ख़बरों को छाप रहे थे. उनके परिवार ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया था.

उनकी याचिका पर कोर्ट ने इस हत्याकांड की जांच नवंबर 2003 को सीबीआई के हवाले कर दी थी. 2007 में सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करते हुए गुरमीत सिंह राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का आरोपी माना था.

2002 में हुई हत्या
अक्टूबर 24, 2002 को छत्रपति पर घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया. उनकी गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. पिता की हत्या के बाद उनका बेटा अंशुल न्याय के लिए भटकता रहा, लेकिन आखिरकार आज इस मामले में कोर्ट राम रहीम की सजा पर फैसला सुनाएगा.

2002 में पत्रकार छत्रपति के समाचार पत्र ‘पूरा सच’ ने एक पत्र प्रकाशित किया था जिसमें यह बताया गया था कि डेरा मुख्यालय में राम रहीम किस प्रकार महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं. इसके बाद छत्रपति को अक्टूबर 2002 में गोली मार दी गई थी.

गंभीर रूप से घायल होने के कारण पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी. सजा के ऐलान को देखते हुए पंचकूला में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चिट्ठी पर संज्ञान लेने के बाद दिसंबर 2002 में सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने इस मामले में धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था और जांच की. इस मामले में राम रहीम को जेल भी हुई थी.