राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा ने स्वच्छ हवा और साफ पानी को मौलिक अधिकारों में जोड़ने की मांग की

देश में विशेषकर दिल्ली में, वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तरों के कारण होने वाली स्थिति पर राज्यसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा हुई. इस अहम मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी तीखी बहस भी हुई. राज्यसभा में कई सांसदों ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी और अच्छे-अच्छे सुझाव दिए.

बीजेपी के राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा ने दिल्ली में प्रदूषण की हालात पर चर्चा करते हुए कहा कि ये विषय ना तो राजनीति का है और ना ही विवाद का है. बल्कि ये विषय मानवजाति के जीवन से जुड़ा हुआ विषय है.

सांसद ने कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान की हम बात करते हैं, जबकि इनके बिना तो हम रह सकते हैं, लेकिन साफ पानी और स्वच्छ हवा के बिना हम नहीं रह सकते हैं. उन्होंने स्वच्छ हवा और साफ पानी को जीवन के लिए जरूरी बताया. उन्होंने मांग कि इनको मौलिक अधिकारों में जोड़ा जाए.

सांसद सिन्हा ने कहा कि आज जो स्थिति हो रही है. वो बहुत ही खतरनाक है. उन्होंने कहा कि आज हमारा एयर पाल्युशन का जो इंडेक्स है, यदि टोरंटो में एयर इंडेक्स 2 है और हमारे यहां साढ़े 300 हो और कभी 490 पहुंच जाए. तो ये बहुत गंभीर विषय है.

सांसद सिन्हा ने कहा कि ये सिर्फ दिल्ली की समस्या नहीं है बल्कि पूरे उत्तर भारत में ये समस्या होती है. उन्होंने कहा कि सितंबर से दिसंबर के बीच हवा की गति धीमी हो जाने के कारण ये समस्या और बढ़ जाती है. इस बार तो कई परिवारों ने दिल्ली छोड़ दी है.

सांसद सिन्हा ने प्रदूषण से निजात देने के लिए एग्रीकल्चर के पैटर्न को बदलने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमें फसलों के पैटर्न को बदलना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हमें कम पानी लेने वाली फसलों को उगाना पड़ेगा.

कंटस्ट्रक्शन से प्रदूषण से निजात दिलाने का उपाय सुझाते हुए सांसद सिन्हा ने कहा कि यदि हम हार्डलैंड्स स्कैपिंग यदि करा लें तो हरियाली भी रहेगी. और धूल भी नहीं उड़ेगी. उन्होंने कहा कि वाहनों को इलेक्ट्रिक करना तो ठीक है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना भी बहुत जरूरी है.

उन्होंने कहा कि प्रदूषण जैसे विषय पर हमें गंभीरता से सोचना होगा. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो पैसे रिलीज किए जा रहे हैं, वो हम खर्च नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो इंतजाम किए जा रहे हैं वो पर्याप्त नहीं हैं.

सांसद ने कहा कि हमें आवश्यक्ता कितनी है ये तो बताया ही नहीं जा रहा है. दिल्ली जैसे शहर में जो संख्या बताई जा रही है, वो तो एक मोहल्ले के लिए भी काफी नहीं होगी. ऐसी परिस्थिति में वृक्षारोपण का एक बहुत बड़ा अभियान चलाना चाहिए.

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