राजस्थान विधानसभा चुनाव- 'जिन पर है जीत का दारोमदार, वही हैं टिकट के दावेदार''

अजमेर. भाजपा और कांग्रेस के लिए इस संक्रमणकाल में जिन लोगों के पास पूरे जिले की सीटें जीताने का दारोमदार है वे लोग ही स्वयं टिकट पाने की जुगत में हैं. अजमेर जिले की 8 सीटों में से 7 पर भाजपा काबिज है.
कोई भी मौजूदा विधायक नहीं चाहता है कि उसका टिकट कटे, लेकिन हर विधानसभा क्षेत्र में जिस प्रकार भावी उम्मीदवारों ने ताल ठोकी है और उपचुनाव के नतीजे व सतह के नीचे दौड़ रहे सत्ता विरोधी करंट ने सभी विधायकों के टिकट कटने के आसार बना रखे हैं.
अजमेर से शिक्षा एवं पंचायती राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल, संसदीय सचिव शत्रुध्न गौतम एवं सुरेश रावत, एडीए अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, भाजपा सांसद डाॅ रघु शर्मा, पीसीसी सचिव महेन्द्र रलावता, पूर्व मेयर कमल बाकोलिया, आदि को इस बार फिर मौका मिलता है या चुनाव में उतरने से रोका जाता है इस पर सबकी निगाह लगी हुई है.
अजमेर में नए दावेदारों ने दी दिग्गजों को चुनौती-
केकड़ी विधानसभा सीट
भाजपा के देहात अध्यक्ष बी पी सारस्वत स्वयं केकड़ी विधानसभा सीट पर नजर लगाए हुए हैं. इस तरह उन्होंने सीधे तौर पर केकड़ी से मौजूदा विधायक और राज्य सरकार में संसदीय सचिव रहे शत्रुध्न गौतम को ही चुनौती दे दी है. एमडीएस यूनिवर्सिटी में वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष रहते लम्बे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे प्रो बी पी सारस्वत अब तक किए संगठनात्मक काम के बदले भाजपा संगठन से ब्राह्मण दक्षिणा में टिकट चाहते हैं.
यूं केकड़ी सीट जातिगत तौर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही ब्राह्मण समाज को सौंप रखी है. कांग्रेस की ओर से इस सीट से उपचुनाव जीत कर सांसद बने डाॅ. रघु शर्मा फिर विधायकी के लिए कांग्रेस से ही दावेदारी जता रहे हैं. उपचुनाव में इस सीट से करीब 35 हजार मतों से भाजपा को मात मिली थी|
हालांकि मोदी लहर में भाजपा यह सीट करीब 8000 मतों से जीत गई थी. इस सीट पर दिव्यांग उम्मीदवार के तौर पर समाजसेवी कृष्णानंद तिवारी ने भी खम्भ ठोक दिया है. कृष्णानंद क्षेत्र की रसोई गैस एजेंसी के संचालक हैं. उनके मृदु व्यवहार और प्रशासनिक, प्रबंधकीय दक्षता की चर्चा घर-घर में है.
अजमेर उत्तर विधानसभा सीट
अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) शिव शंकर हेड़ा ने अब खुलकर अजमेर उत्तर से चुनाव लड़ने की ताल ठोक दी है. हेड़ा की दावेदारी से वर्तमान विधायक और प्रदेश में बहुचर्चित स्कूली शिक्षा एवं पंचायती राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी को अपनी सीट सुरक्षित रख पाने का खतरा नजर आने लगा है. देवनानी लगातार चैथी बार चुनाव लड़कर अजमेर से चैका जमाने के फिराक में हैं. हेड़ा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के महानगर संघ चालक और भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं.
इसके अलावा भाजपा पर वैश्य समाज को विगत चुनाव में उपेक्षित रखे जाने के आरोप से मुक्ति के लिए हेड़ा की दावेदारी में दम नजर आ रहा है. वैसे इस सीट से युवा तुरुप के पत्ते के तौर पर एडवोकेट नीरज जैन का नाम भी तेजी से उभरा है. नीरज भाजपा की युवा राजनीति में राष्ट्रीय पहचान रखने वाले और लगातार एक-डेढ़ दशक से नगर पार्षद चुने जाने वाले कर्मठ नेता हैं.
इस सीट को लेकर हमेशा ही सिंधी और गैर सिंधी दावेदारी का मामला हर चुनाव में उठता रहा है. वर्तमान में भी अघोषित रूप से सिंधी आरक्षित समझे जाने वाले इस विधानसभा क्षेत्र के 28 पार्षदों में सिर्फ एक ही सिंधी पार्षद चुना गया है. सिंधी समाज में नाराजगी, ब्राह्मण और वैश्यों से प्रतिद्वंद्विता, नए परिसीमन के बाद सिंधी समुदाय का क्षेत्र में कम रह जाना मोदी लहर में 20000 मतों से जीती सीट का उपचुनाव में 7000 मतों से पिछड़ना, अजमेर की मूलभूत आवश्यकता पानी, बिजली, चिकित्सा, शिक्षा के प्रति कतई गंभीर नहीं होना.  आदि बहुत से कारण हैं जो इस बार चुनौती दे रहे हैं.
जोरदार तो यह भी है कि कांग्रेस की ओर से भी इस सीट पर पीसीसी सचिव महेन्द्र सिंह रलावता ने गैर सिंधी के तौर पर टिकट पाने का दबाव बना रखा है. यहां से एक उद्योगपति सिंधी समुदाय के दीपक हासानी ने भी उम्मीदवारी जता रखी है. कांग्रेस यहां से दो बार सिंधी के विरुद्ध गैर सिंधी प्रयोग कर मात खा चुकी है| इसलिए देखना है कि इस बार दोनों ही पार्टियां अपना स्टैंड बदलती हैं या सिंधी पर ही कायम रहती हैं.
अजमेर दक्षिण विधानसभा सीट
अजमेर की जिला प्रमुख वंदना नोगिया ने अजमेर दक्षिण से खुली दावेदारी जता कर वर्तमान भाजपा विधायक एवं महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. श्रीमती भदेल भी इस बार अजमेर दक्षिण से चैथा चुनाव लड़ने को पूरे दमखम और आत्मविश्वास के साथ तैयार हैं. दक्षिण में भी सामान्य तौर पर कोली समुदाय का बाहुल्य रहा है और रेगर समाज चुनौती देता रहा है.
दोनों ही समाजों की संख्या बल में 19-20 का अंतर है. यद्यपि श्रीमती भदेल की व्यक्तिगत छवि, महिला उम्मीदवार, तीन बार की विजेता, सरकार में मंत्री हैं लेकिन उपचुनाव में 13 हजार मतों से पिछड़ना और स्वयं के निवास स्थान वाले वार्ड से ही कांग्रेस पार्षद का जीतना उनके विरोधियों द्वारा मुद्दा बनाया जाता रहा है. वैसे दक्षिण में भाजपा से पूर्व में सभापति का चुनाव लड़ चुके डाॅ प्रियशील हाड़ा भी दावेदार हैं|
कांग्रेस की ओर से भी पूर्व विधायक उम्मीदवार रहे हेमंत भाटी ने फिर से मजबूत दावेदारी ठोक रखी है. मोदी लहर में वे पिछड़े थे किन्तु पार्षद चुनाव में उन्होंने अपने अकेले दम पर क्षेत्र से कई पार्षद निर्वाचित करा कर क्षे़त्र में अपना दबदबा दर्शाया था. कांग्रेस से पूर्व मेयर कमल बाकोलिया भी रेगर समुदाय से टिकट की दौड़ में हैं.
पुष्कर विधानसभा सीट
पुष्कर में भाजपा विधायक और संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत को अपनी ही जाति के प्रधान अशोक सिंह रावत और रावत समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले राजेन्द्र सिंह रावत से संघर्ष करना पड़ रहा है. यहां यूं तो और भी बहुत से दावेदार हैं.  इनमें संत बिरादरी के महंत सेवानंद गिरी भी एक हैं जो रावत समाज का ही प्रतिनिधित्व भी करते हैं. पूर्व मंत्री रमजान खां के पुत्र ने भी दावेदारी पेश की है.
यहां से कांग्रेस की पूर्व विधायक एवं कांग्रेस सरकार में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री रहीं नसीम अख्तर इंसाफ, पूर्व विधायक एवं अजमेर यूआईटी चेयरमैन रहे श्रीगोपाल बाहेती सहित अनेक ने दावेदारी जता रखी है. पीएम मोदी का दौरा रद्द होने, तीर्थराज पुष्कर ब्रह्मा मंदिर का एंट्री प्लाजा का लोकार्पण आनन-फानन में होने, पानी की किल्लत दूर नहीं होने, सरोवर के संरक्षण पर ध्यान नहीं देने के कारण भाजपा को इस सीट पर बड़ी चुनौती है.
किशनगढ़ विधानसभा सीट
किशनगढ़ से दो बार के विधायक भागीरथ चैधरी की इस बार हैट्रिक हो पाएगी या नहीं, मुश्किल है. यह जाट बहुल सीट है. उपचुनाव में 5 हजार से पीछे रही इस सीट से स्वयं भागीरथ चैधरी मोदी लहर में 30 हजार मतों से जीते थे. पूर्व नगर परिषद सभापति और प्रदेश भाजपा के सदस्य सुरेश टांक की दावेदारी से मुकाबला कड़ा हो गया है.
भाजपा पूर्व सांसद सांवरलाल जाट के पुत्र और नसीराबाद से टिकट के दावेदार रामस्वरूप लांबा को यहां से आजमा सकती है. इससे जहां कांग्रेस के कब्जे वाली नसीराबाद सीट पर फिर से गुर्जर समुदाय या वैश्य समुदाय को टिकट देकर उस सीट को इस बार वापस निकाला जा सके. यूं किशनगढ़ से मार्बल उद्योगपति, ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, पावरलूम मालिक, निर्माण क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूर सभी सत्ता से गहरी नाराजगी रखे हुए हैं.
मसूदा विधानसभा सीट
मसूदा सीट पर भाजपा की विधायक सुशील कंवर पलाड़ा के सामने पूर्व जिलाध्यक्ष नवीन शर्मा खड़े हैं. उपचुनाव में यह सीट 6 हजार मतों से पीछे रही थी जबकि स्वयं पलाड़ा संघर्ष और चुनौती पूर्ण मुकाबले में 4 हजार मतों से जीती थीं. कांग्रेस की ओर से यहां सरपंच संघ के अध्यक्ष एवं अजमेर देहात कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठौड़ ने ताल ठोक रखी है. इस सीट से कांग्रेस कभी मुस्लिम कार्ड तो कभी वैश्य कार्ड खेलते आई है. कांग्र्रेस के पूर्व विधायक कय्यूम खान, वाहिद चीता, पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत आदि लाइन में हैं. क्षेत्र की शुद्ध पानी, सड़क, समस्याएं जस की तस हैं.
ब्यावर विधानसभा सीट
ब्यावर में विधायक शंकर सिंह रावत के सामने तो विरोधियों की लम्बी लाइन लगी है. यहां इस बार शंकर सिंह रावत का विरोध भी है. उन्हें रावत राजपूत महासभा के महेन्द्रसिंह रावत, श्रवण सिंह रावत, प्रधान गायित्री रावत व जिला परिषद सदस्य संतोष रावत, पूर्व सांसद रासा सिंह रावत के पुत्र तिलक रावत ने चुनौती दे रखी है. वैश्य समाज से भरत मालानी, नगरपालिका चेयरमैन रिश्वत प्रकरण में यह सीट भाजपा के लिए डैमेज करने वाली साबित हुई है. इस सीट पर भाजपा को रावत को ही चेहरा बदल कर टिकट देना है. कांग्रेस में पारस पंच पीसीसी सचिव वैश्य समुदाय के शहरी कार्ड पर उम्मीदवार उतारेंगे, अन्यथा रावत को टिकट दिया गया तो जवाजा ब्लाक अध्यक्ष विरेंद्र सिंह रावत को मैदान में लाए जाने की उम्मीद है.
नसीराबाद विधानसभा सीट
नसीराबाद में उपचुनाव जीतने पर कांग्रेस के रामनारायण गुर्जर विधायक हैं| इसलिए भाजपा का कोई भी नेता दावेदारी करने में पीछे नहीं है. यहां से पूर्व विधायक सांवर लाल जाट के पुत्र रामस्वरूप लांबा दावेदारी रख रहे हैं यद्यपि वे उप चुनाव हार चुके हैं.
इस अलावा पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाड़िया भी प्रमुख दावेदार हैं. युवा तुरुप के रूप में यहां से भाजपा गुर्जर कार्ड खेलती है तो ओम भडाणा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. इससे कई दशकों से कांग्रेस के पूर्व वन मंत्री गोविंद सिंह गुर्जर परिवार में ही सत्ता रहने का मिथक एक बार फिर टूट सकता है.
संतोष/राधा रमण