राजस्थानः सीएम गहलोत ने सभी विधायकों से साथ आने की अपील की

Ashok Gehlot
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जयपुर, राजस्थान।

राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों से अपील की है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए वे साथ आएं. उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बरकरार रखने और गलत परंपराओं से बचने के लिए आप जनता की आवाज सुनें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी के विधायक हों, लेकिन मतदाताओं की भावना को समझ कर, प्रदेश हित में जनता द्वारा चुनी हुई बहुमत प्राप्त सरकार मजबूती के साथ काम करती रहे और सरकार को अस्थिर करने के मंसूबे कामयाब नहीं हो सके.

गहलोत ने प्रदेश के समस्त विधायकों को लिखे अपने पत्र में सरकार के विकास कार्यों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने संवेदनशील, पारदर्शी तरीके से सभी क्षेत्रों में काम किया है. उन्होंने लिखा कि सरकार ने शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, बिजली-पानी, सड़क एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ पंचायत समिति, उपखंड स्तर पर भी उल्लेखनीय फैसले किए हैं, जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है.

उन्होंने देश और प्रदेश में कोरोना संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इस महामारी के कारण अचानक स्थितियां विकट हो गईं. कोरोना के खिलाफ हम सब मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं. हमने इस संकट के समाधान और जनता को राहत पहुंचाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव का सम्मान करते हुए उनके आधार पर कई फैसले भी किए हैं. आपके इस सहयोग से हम प्रदेश में कोरोना संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने में काफी हद तक सफल हुए हैं.

मुख्‍यमंत्री ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि कोरोना महामारी इतना भयंकर रूप ले चुकी है. इस बीमारी से किस परिवार को नुकसान झेलना पड़ेगा, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. ऐसी विकट परिस्थिति में भी हमारे कुछ साथी और विपक्ष के नेता मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई हमारी सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं.

उन्‍होंने कहा कि यह 1993-96 के दौरान भी विधायकों की खरीद कर तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के सरकार को गिराने के प्रयास किए गए थे. उस समय मैंने तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत एवं प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मिलकर व्यक्तिगत विरोध किया था.

उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार को गिराना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और मैं इसे राजनीतिक महापाप की श्रेणी में मानता हूं. दल विरोधी कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में 6 बसपा विधायकों ने कानून के दायरे में रहकर कांग्रेस में विलय का निर्णय लिया, जो की विधि सम्‍मत है.

उन्होंने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तोड़फोड़ एवं खरीद फरोख्त करके सरकार को अस्थिर करने को किसी भी दृष्टि में न्‍यायोचित नहीं माना जा सकता, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है. जनता का फैसला शिरोधार्य रहता है. यही परंपरा रही है.

उन्होंने कहा कि जनता से चुनकर जो नुमाइंदे आते हैं, चाहे वह किसी भी पार्टी के गुट के क्यों ना हों, हम सब उनका सम्मान करते हैं. हम उनके क्षेत्र मे बिना भेदभाव के विकास करते हैं. प्रदेश के सभी क्षेत्रों का चहुंमुखी विकास ही हमारा लक्ष्य है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश वासियों के व्यापक हित में सभी विधायक सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे.

हिन्दुस्थान समाचार/संदीप