अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए राज्यों की अनुमति जरूरी नहीं

प्रवासी श्रमिकों को लेकर जिस तरह से राजनीति शुरू हुई, उसको लेकर रेल मंत्रालय ने सख्त हो गया है. दरअसल कई राज्य ऐसे हैं जो केंद्र द्वारा चलाई जा रही स्पेशल श्रमिक ट्रेनों को इजाजत नहीं दे रहे हैं. जिसके कारण मजदूरों को घर जाने में दिक्कत हो रही है.

बड़ी संख्या में मजदूर घर जाना चाहते हैं. लेकिन राज्य सरकारों की अनदेखी के कारण वे परेशान हो रहे हैं. मजदूरों की परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब नई मानक संचालन प्रक्रिया को जारी किया है.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने संशोधित SOP जारी करते हुए कहा कि श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियां चलाने की अनुमति रेलवे मंत्रालय, गृह मंत्रालय के साथ परामर्श कर देगा. इस SOP में कहा गया है कि राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभारी अधिकारियों को नामित करना होगा और ऐसे फंसे हुए लोगों को भेजने या उनके आने पर जरूरी इंतजाम करने होंगे.

वहीं रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेई ने बताया कि अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन को चलाने के लिए राज्यों की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि नई एसओपी के बाद उस राज्य की सहमति लेना अब आवश्यक नहीं है जहां ट्रेन का समापन होना है. उन्होंने कहा कि नई एसओपी के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की समय-सारिणी पर अब अंतिम फैसला रेल मंत्रालय करेगा.

उन्होंने बताया कि रेलवे द्वारा संबंधित राज्य को समय-सारणी प्रदान कर दी जाएगी जिससे वे अपने राज्य में फंसे हुए मजदूरों को भेजने या लाने क लिए जरूरी प्रबंध किए जा सकें.

वहीं इससे पहले जो नियम था उसके मुताबिक जिस राज्य से प्रवासी चलेंगे उस राज्य को जिस राज्य में प्रवासी लौटना चाहते हैं उसकी सहमति लेनी होगी और ट्रेन के प्रस्थान से पहले इसकी एक प्रति रेलवे को उपलब्ध करानी होगी.

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