नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 लोकसभा चुनावों में दो जगह से चुनाव लड़ रहे थे. कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी और दूसरी केरल की वायनाड सीट. वायनाड से राहुल गांधी पहली बार चुनाव लड़ा और 8 लाख वोटों से जीत हासिल की है. वायनाड में तीसरे चरण यानी 23 अप्रैल को वोट डाले गए थे.

अमेठी से मिली हार– राहुल गांधी वायनाड से तो जीत गए लेकिन अपनी परंपरागत सीट अमेठी से स्मृति ईरानी ने उन्हें करारी शिकस्त दी है. राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेस कर मोदी को जीत की बधाई दी. वहीं स्मृति ईरानी को अमेठी से जीतने पर मुबारकबाद दी.

वायनाड क्यों चुना– राहुल गांधी के अनुसार उन्होंने वायनाड जाना इसलिए पसंद किया क्योंकि मोदी सरकार में दक्षिण भारत का एकदम अलग पड़ गया है. वहीं इससे इतर बीजेपी ने इसे राहुल गांधी का डर बताया है.

चार गांधी चुनावी मैदान में– वायनाड से मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प था क्योंकि यहां से राहुल के सामने तीन और गांधी चुनावी मैदान में हैं. अगिला इंडिया मक्कल कझगम पार्टी के कैंडिडेट के राघुल गांधी और दो निर्दलीय उम्मीदवार केई राहुल गांधी और एम शिवप्रसाद गांधी से सीधा मुकाबला है. वायनाड से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने के कारण ये एक हाई प्रोफाइल सीट बन गई.

2014 में भी कांग्रेस ने जमाया कब्जा– 2014 में मोदी लहर के बावजूद इस सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया. एक दौर में दक्षिण भारत को कांग्रेस को गढ़़ माना जाता था. ऐसे में राहुल गांधी राजनीतिक रण में उतरकर इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं. पिछले दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को यहां से लगातार जीत हासिल हुई है.

राहुल गांधी की राह वायनाड से थी आसान– वायनाड में मुस्लिम और ईसाई आबादी हिन्दुओं से ज्यादा होने के कारण यहां से राहुल गांधी की राह आसान है. 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वायनाड पर 20 हजार 870 वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई थी. कांग्रेस के एमआई शानवास को सीपीएम के सत्यन मोकेरी से सिर्फ 1.81 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे. शानवास को 3 लाख 77 हजार 035 और मोकेरी को 3 लाख 56 हजार 165 वोट मिले थे. बीजेपी तब चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थी और उसके प्रत्याशी पीआर रस्मिलनाथ को 80 हजार 752 वोट मिले थे.