इतिहास से साक्षात्कार करें राहुल

बलबीर दत्त

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकलापों और नीतियों (विदेश नीति समेत) की लगातार आलोचना और भर्त्सना करते आ रहे हैं. विपक्षी दल के नेता के रूप में उन्हें ऐसा करने का अधिकार है. लेकिन किसी भी अधिकार के साथ एक दायित्व भी होता है. 

उथली बातों से सस्ती वाहवाही तो लूटी जा सकती है लेकिन राष्ट्रहित में प्रतिरक्षा और विदेश नीति जैसे संवेदनशील मामलों में जिस सावधानी व सतर्कता की आवश्यकता है, उसे वह नहीं बरत रहे.

चुनाव के दौर में राहुल गांधी मोदी सरकार की चीन और पाकिस्तान संबंधी नीति को लेकर कुछ ज्यादा ही हवलावर हो गये हैं. चीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में आतंकी सरगना मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने वाले प्रस्ताव पर एक बार फिर अड़ंगा लगाया तो राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया. 

वह तमाम लक्ष्मण रेखाओं का उल्लंघन कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग से डरे हुए हैं. इसलिए चीन के खिलाफ कुछ नहीं बोलते. 

उनकी पार्टी ने एक विद्रूप वीडियो में मोदी को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगे झुकते -बोलते दिखाया है. यह अशिष्टता की हद है. इसमें प्रकारांतर से अपने ही देश को नीचा दिखाया गया है.

2009 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने का प्रस्तान पेश किया था, तब भारत अकेला था. इसके बाद 2016 व 2017, मोदी सरकार के कार्यकाल में फिर प्रस्तान लाये गये. 

तब चीन को छोड़ सुरक्षा परिषद के सभी 14 स्थायी-अस्थायी सदस्यों ने साथ दिया. पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्य फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ सभी अस्थायी सदस्यों की ओर से प्रस्ताव लाया गया था.

चीन को सफाई देनी पड़ी कि वह मसूद के खिलाफ सबूतों की जांच के लिए कुछ समय चाहता है. राहुल गांधी ने डोकलाम विवाद को भी फिर से उठाया और कहा कि मोदी सरकार चीन से भयभीत है.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 1–15 अप्रैल के अंक में…

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