कितनी बार भारत से मार खाएगा पाक-आर के सिन्हा

आर.के. सिन्हा

इमरान खान के पाकिस्तान को भारत से बार-बार मार-खाने की आदत सी पड़ गई है. अब भारतीय फौजें पाकिस्तानियों को उसके घर में घुसकर मारती है. वह तो अब जूते खाने का आदी हो चुका है. भोजपुरी में लत खाने के अभ्यस्त व्यक्तियों को “लतखोर” कहा जाता है . उसे जितने जूते मारे जाएं वह कम ही हैं.

वह पड़ोसी के नाम पर कलंक है. उसकी ताजा हिमाकत पर तो भारतीय फौजों ने तोपों का मुंह एलओसी के उस पार मोड़ भर दिया . नतीजा यह हुआ कि करीब दो दर्जन आतंकियों समेत आधा दर्जन पाकिस्तानी सैनिक तत्काल ढेर हो गए.

यह नए भारत का आक्रामक चेहरा है. बुद्ध और गांधी के आदर्शों को मानने वाला भारत अब दुश्मन की गर्दन में अंगूठा देने के लिए भी तैयार है. अब भारत का धैर्य भी तो जवाब दे चुका है. भारत अब पाकिस्तान को तो किसी भी तरह की रियायत देने के लिए तैयार नहीं है.

भारत की रक्षानीति में बदलाव का यह सिलसिला 2016 से चल रहा है. भारत ने उरी में आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक किया, फिर दुबारा भारत को फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक करना पड़ा.

भारत ने ताजा हमले में तोपों से ही हमला बोला. क्योंकि, दुश्मन सामने ही दिख रहे थे I पाक सेना आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसाने की जुगत कर रही थी I यानी 2016 के बाद भारत ने तीसरी बार पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है.

दरअसल पाकिस्तान की सेना के चीफ कमर जावेद बाजवा के इशारों पर जब उनकी सेना ने विगत शनिवार को दुर्दान्त आतंकियों की घुसपैठ करवाने के इरादे से कवर फायरिंग शुरू की तो उसने ख्वाबों में भी नहीं सोचा था कि इस बार भारत का जवाबी प्रहार तत्काल और इतना करारा होगा.

हालांकि इस हमले के बाद कुछ मीडिया और राजनीति के जयचंद कहते हुए मिले कि सेना ने हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों के मद्देनजर हमला किया. अरे भाई, यह क्यों नहीं कहते कि दर्जनों आतंकी घुसपैठ करके आतंक का तांडव करते तब किसका फायदा होता?

अगर आप सेना की उपर्युक्त कार्रवाई पर मेरी राय को जानना चाहते हैं तो मैं इतना ही कहूंगा कि ऐसे चुनाव रोज आएं ताकि पाकिस्तान जैसे धूर्त पड़ोसी को सबक सिखाया जाता रहे. जरा याद करें 2008 के मुंबई हमले को. उस हमले ने भारत के आत्म सम्मान को गहरा आघात पहुंचाया था.

फिर भी भारत सिर झुकाकर चुप्पी साधे रहा था. पर 2008 और 2019 में अब बहुत अंतर आ चुका है. अब भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति दुनिया सामने हैं.

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान के दुष्प्रचार को दुनिया भर में भाव न मिलने के बाद भारतीय विदेश नीति का कूटनीति और रणनीति के स्तर पर और अधिक आक्रामक होना स्वाभाविक भी है. इसका सारे देश को एक स्वर से स्वागत करना चाहिए और जो ऐसा न करे ऐसे राष्ट्रद्रोहियों का सामाजिक तिरस्कार भी होना चाहिए .

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