सोनडीहा गैंगरेप में भी पुलिस जांच पर उठा सवाल, पुलिस जांच पर पटवा समाज को भरोसा नहीं

एडीजी विधि-व्यवस्था के समक्ष सोनडीहा गैंगरेप में पुलिस कार्रवाई पर उठाया सवाल

बहुचर्चित अंजना हत्याकांड में गया पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ पटवा समाज को बिलकुल भरोसा नहीं है .पटवा समाज ने सोनडीहा गैंग रैप में गया पुलिस की कार्रवाई का उदाहरण देते हुए इस मामले की निष्पक्ष,निर्भीक और पारदर्शी जांच न होने का आरोप लगाया.पटवा समाज ने तत्कालीन अपर महानिदेशक विधि-व्यवस्था आलोकराज के समक्ष गया पुलिस की जांच एवं कारवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

उल्लेखनीय है कि 13 जून 2018 को सोनडीहा गांव के पास मां-बेटी के साथ सड़क लुटेरों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था.घटना के समय आंती थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण चिकित्सक अपनी पत्नी और बेटी के साथ गुरारू से वापस अपने गांव लौट रहे थे. इस दौरान अपराधियों ने चिकित्सक के साथ मारपीट कर उन्हें बंधक बनाकर उनके सामने ही उनकी पत्नी और बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया.

शेरघाटी के तत्कालीन डीएसपी मनीष कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने इस मामले में सोनडीहा गांव के दो दर्जन से अधिक युवकों को हिरासत में ले लिया.मनीष पहले टिकारी एसडीपीओ थे. कोंच थाना टिकारी के एसडीपीओ के कार्यक्षेत्र में आता है. पुलिस ने सोनडीहा गांव के दो युवकों गौरव और शिवम् को मां-बेटी सामूहिक दुष्कर्म कांड में आरोपी घोषित कर जेल भेज दिया .

एडीजी,सीआईडी विनय कुमार के मार्गदर्शन में गया पुलिस ने वैज्ञानिक जांच की तो परैया थाना क्षेत्र के कमलदाह गांव के एक दर्जन से अधिक अपराधियों का हाथ गैंगरेप में सामने आया. गया पुलिस ने सभी आरोपियों को कमलदाह गांव से गिरफ्तार कर जेल भेजा.

सवाल उठना लाजिमी था कि यदि कमलदाह गांव के पकड़े गए एक दर्जन से अधिक अपराधी और सोनडीहा गांव के दो युवकों में असली गुनहगार कौन है? वैज्ञानिक अनुसंधान सड़क लुटेरों को मां-बेटी गैंग रेप का आरोपी बता रहा था.

पीड़िताओं ने भी सोनडीहा गांव के गौरव और शिवम् की पहचान टीआई परेड और अदालत में नहीं की मगर गया पुलिस ने कमलदाह और सोनडीहा गांव से पकड़े गए सभी को दोषी ठहराते हुए अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया. इसके बाद पटना उच्च न्यायालय से शिवम् और गौरव को जमानत मिल गयी .

पटवा समाज के आंदोलन को व्यापक जन समर्थन मिला. स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए राजग के वोट बैंक रहे पटवा समाज की नाराज़गी दूर करने पुलिस मुख्यालय ने कोई रास्ता निकालने की पहल की. सीआईडी एवं फारेंसिक टीम ने घटनास्थल से वैज्ञानिक जांच के लिए प्रदर्श एकत्रित किए .

पटवा समाज में इस बात से नाराजगी थी कि बगैर किसी ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य के पीड़ित पिता तुराज पटवा, उसके मित्र लीला पटवा और कुलेश्वरी देवी को गया पुलिस ने जेल भेज दिया. दूसरी ओर गया पुलिस का दावा था कि पीड़िता की बहन की अदालत में दिए गए दप्रसं की धारा 164 के तहत बयान के आधार पर कार्रवाई की गई है.

पटवा समाज का आरोप है कि अंजना की मां और उसकी पुत्रियों के साथ मारपीट व भयादोहन कर अदालत में बयान देने पर मजबूर किया गया था.

इसके बाद तत्कालीन एडीजी विधि-व्यवस्था आलोकराज पटवा टोली पहुंचे. पटवा समाज के प्रतिनिधियों ने गया पुलिस और विशेष रूप से वजीरगंज के एसडीपीओ रहे अभिजीत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.पटवा समाज का आरोप था कि गया पुलिस फजीहत से बचने के लिए आनन-फानन में पीड़ित पिता और पटवा समाज के दो लोगों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा रही है.

ताकि राज्य सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों की नजरों में उसकी किरकिरी न हो.पटवा समाज ने एडीजी आलोकराज से अंजना हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग की मगर इसकी अनसुनी कर दी गयी.


हिंदुस्थान समाचार/ पंकज कुमार/विभाकर

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