क्रिसमस पर असम को पीएम मोदी देंगे बड़ा तोहफा

क्रिसमस और दिन पीएम मोदी असम को एक बड़ा तोहफा देने वाले हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी देश के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल बोगीबुल पुल का उद्घाटन करेंगे. यह पुल ब्रम्हपुत्र नदी पर बना है और असम को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ता है.

पुल पर नहीं होगा भूकंप का असर

करीब पांच किमी लंबे इस पुल पर 7 रिक्टर स्केल या उससे अधिक के भूकंप के झटकों का असर भी नहीं होगा. भूकंप के झटकों को आसानी से झेलने के लिए इस पुल में सेस्मिक रेस्ट्रेनर्स का उपयोग किया गया है.

यह पुल डिब्रूगढ़ को यह ढेमाजी से जोड़ेगा. यही नहीं इस पुल के जरिए अरुणाचल प्रदेश और चीन की सरहद से लगे अन्य प्रदेशों से आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा. यह 1700 मेगाटन तक का भार झेल सकता है. यानी पुल इतना मजबूत है कि इसके ऊपर से भारतीय सेना के टैंकों को गुजारा जा सकता है. इस पुल की मदद से अब चीनी सरहद पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी. साथ ही असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच दूरी 100 किमी. तक कम हो जाएगी.

16 साल से था इंतजार

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने जनवरी 1997 में इस पुल की आधारशिला रखी थी. और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसके निर्माण का कार्य शुरू कराया था. पुल को बनाने के पीछे का मकसद देश के पूर्वी बॉर्डर से अन्य हिस्सों के बीच के आवागमन को सुलभ और सरल बनाना है.

शुभारंभ पर होगा भव्य कार्यक्रम

प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के बेहद पुख्ता इंतजाम किए हैं. पुल के उद्घाटन के मद्देनजर बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं. पुल के उत्तरी छोर पर कारेंग बाली चापरी में बोगीबील पुल के उद्घाटन के मद्देनजर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान पीएम मोदी धेमाजी में आयोजित एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे. साथ ही एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे.

कार्यक्रम में लगभग 2 लाख लोगों की उपस्थिति रहने की संभावना है. उद्घाटन समारोह में असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू के अलावा दोनों राज्यों के कई मंत्री, बीजेपी के शीर्ष नेता भी मौजूद रहेंगे.

पुल के नाम को लेकर राजनीति

पुल के उद्घाटन को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस और क्षेत्रीयतावादी पार्टी असम गण परिषद पुल को अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही हैं. जबकि बीजेपी इसे अपनी उपलब्धि बता रही है. पुल के नामकरण को लेकर भी स्थानीय दल और संगठन अपना अपना दावा करते हुए सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उनके समाज के ऐतिहासिक आदर्श के नाम पर उसका नाम रखा जाए. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस पुल का क्या नाम रखा जाएगा.

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