गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मेदी को मिली क्लीन चिट, विधानसभा में पेश की गई नानावती आयोग की रिपोर्ट

जस्टिस नानावती मेहता आयोग ने बुधवार 12 दिसंबर 2012 को गुजरात में हुए दंगों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तत्कालीन मुख्यमंत्री) को क्लीन चिट दे दी गई है. आयोग की फाइनल रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया गया. 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाए जाने के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी.

बुधवार को गुजरात विधानसभा में दंगों की जांच कर रहे नानावती आयोग की अंतिम रिपोर्ट रखी गई. गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि आयोग की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगे आरोप खारिज किए गए हैं.

रिपोर्ट को तत्कालीन राज्य सरकार को सौंपे जाने के पांच साल बाद सदन के पटल पर रखा गया. नानावती-मेहता कमिशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी जलाए जाने के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा सुनियोजित नहीं थी. आयोग ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार को अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट दी है.

आयोग ने 1,500 से अधिक पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि राज्य के किसी मंत्री ने इन हमलों के लिए उकसाया या भड़काया. इसमें कहा गया है कि कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस अप्रभावी रही क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी नहीं थे या वे हथियारों से अच्छी तरह लैस नहीं थे.

रिटायर्ड न्यायाधीश जीटी नानावती और अक्षय मेहता ने 2002 दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट 2014 में राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपी थी. इन दंगों में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के थे.

इसकी जांच के लिए तीन मार्च 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जीटी नानावती की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया. न्यायमूर्ति केजी शाह आयोग के दूसरे सदस्य थे. 2009 में शाह के निधन के बाद अक्षय मेहता को सदस्य बनाया गया.

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