Jammu-Kashmir में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने की Rajya Sabha से मिली इजाजत, आरक्षण बिल भी पास

  • उच्च सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि 2 जुलाई को राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो रही है
  • समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का समर्थन किया.

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की समयसीमा 6 महीने बढ़ाने के लिए राज्यसभा से इजाजत मिल चुकी है. यानी राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने इसके लिए जो प्रस्ताव पेश किया था, वो पास हो गया है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर आरक्षण संसोधन बिल भी पास हो गया है.

उच्च सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि 2 जुलाई को राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो रही है. उन्होंने कहा कि 20 जून 2018 को पीडीपी सरकार के पास समर्थन न होने की वजह और फिर किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि सरकार गिरने के बाद वहां 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया गया, इसके बाद राज्यपाल ने 21 नवंबर 2018 को विधानसभा भंग कर दी. राज्यपाल शासन के बाद केंद्र सरकार ने 256 का इस्तेमार कर 20 दिसंबर 2018 से राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया. आज का प्रस्ताव इस शासन को और 6 माह बढ़ाने का प्रस्ताव है.

विरोधियों ने किया समर्थन

उच्च सदन में इस प्रस्ताव पर तीखी बहस होने के बाद इसे पास कर दिया गया. राज्यसभा में इस बिल पर तीखी बहस करते हुए बीजेपी की कई कट्टर विरोधी पार्टियों ने इस बिल का समर्थन किया है. समाजवादी पार्टी, टीएमसी और आरजेडी सहित विपक्ष के कई दलों ने इस बिल का समर्थन किया.

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कल राष्ट्रपति शासन की समयसीमा खत्म हो रही है. अब एक दिन में चुनाव तो हो नहीं सकते, तो राष्ट्रपति शासन लगाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.

हालांकि डीएमके ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए बीजेपी पर जमकर हमला बोला.  डीएमके सांसद ने कहा कि बीजेपी एक देश एक चुनाव कराने में विफल रही है, तभी लोकसभा के साथ जम्मू कश्मीर चुनाव नहीं कराए गए. उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है, विधानसभा चुनाव का एलान होना चाहिए.

क्या कहता है बिल?

जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक के तहत जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 3 फीसदी आरक्षण को विस्तार दिया गया है.

इस बिल से यहां के युवाओं को सीधी भर्ती, प्रमोशन और संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आरक्षण मिल सकेगा. पहले इसका लाभ अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे व्यक्तियों के लिए नहीं था, लेकिन लेकिन इस बिल के कानून बन जाने के बाद यह लोग भी आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे.

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