नक्सलियों-आतंकियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

योगेश कुमार सोनी

केंद्र सरकार ने नक्सलियों और आतंकियों पर शिकंजा कसने के लिए एक और कदम उठाया है. सरकार जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की यूनिट के प्रशिक्षित कुत्तों को हाईटेक कैमरों के साथ संदिग्ध इलाकों में उतारेगी.

सीआरपीएफ फिलहाल इसके लिए करीब दो दर्जन पुलिस डॉग कैमरे खरीदेगी. इससे पहले बीते सप्ताह गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ को राशन भत्ते के रुप में अन्य सौगात भी दी है. सीआरपीएफ हमारे देश में इस तरह से कैमरा प्रयोग करने वाली पहली सुरक्षाबल होगी. प्रशिक्षित डॉग्स के पिछले हिस्से में कैमरे लगाए जाएंगे.

जानकारी के अनुसार यह कैमरा हाई रिजोल्यूशन के साथ वाटर व स्क्रैच प्रूफ भी होंगे. डॉग के पिछले हिस्से में कैमरे लगाए जाने का कारण यह है कि इससे पता चलता रहेगा कि वह क्या देख रहा है.

कई देशों में इस तरह के प्रयोग पहले से चल रहे हैं. इसके लिए विदेशी सेना के अधिकारियों द्वारा डॉग स्क्वायड में तैनात कर्मचारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.

कई देशों में के-नाइन इकाइयां हैं, जो बहुत ही सुलझे हुए तरीके से काम करती हैं. कई देशों में डॉग के गले में कैमरे लगाए जाते हैं तो कई में उनके पिछले हिस्से में. इनके जरिए अपराधियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है.

इससे अपराध पर नियंत्रण करने में बड़ी मदद मिलती है. कई देशों में डॉग स्क्वायड सैन्यबल के रुप में काम करता है.

सरकार आतंक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. देश की सेनाओं को भी समय-समय पर अपडेट व अपग्रेड किया जाता रहा है. देश के रक्षकों को हर वो सुविधा मिलनी चाहिए जिसकी दरकार कॉफी लंबे समय से थी.

देश की तरक्की तभी समझी जाती है जब जनता सुरक्षित होती है. जनता तब सुरक्षित होगी जब जवान अपडेट और मुश्तैद होंगे. देश की सुरक्षा में सालाना सैकड़ों सैनिकों की जान जाती रही है. न जाने कितने परिवारों को चिराग बुझते हैं.

लेकिन अब तकनीक का प्रयोग करते हुए हमें देश की जनता के साथ सैनिकों को भी सुरक्षित करना होगा. जिन गतिविधियों पर किसी सैनिक के द्वारा निगाह रखी जाती है अब उन पर कुत्तों में कैमरे फिट करके संदिग्ध जगहों पर निगरानी रखी जाएगी.

ऐसे कुत्तों को बेहद प्रशिक्षित कोच द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है. इससे कई तरह के फायदे मिलेंगे. सबसे पहला तो किसी आतंकी जगह, जहां निगरानी रखने में जान का खतरा होता है, वहां डॉग में लगा कैमरा सब कैद कर सकेगा. दूसरा, कोई भी नक्सली या आतंकी घटना को अंजाम देकर भाग जाता था.

उसकी पहचान करनी बेहद मुश्किल हो जाती थी. कैमरे की जद में आने से उसकी पहचान आसानी से हो जाएगी. इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि यदि कोई आतंकी या अन्य कोई जो संदिग्ध है तो उस पर यह प्रशिक्षित कुत्ते अटैक कर सकते हैं. इससे कई तरह के फायदे सीआरपीएफ को मिलेंगे.

ज्ञात हो कि सितम्बर 2018 में स्पेशल कंमाडो यूनिट को आतंकवादी हमले की खोजबीन करने व उनके ठिकानों पर पहुंचने के लिए स्निफर डॉग दिए गए थे. इन डॉग के सिर पर कैमरा लगाकर इस्तेमाल करके आंतकियों की गतिविधियों पर नज़र रखी जाने लगी थी.

इस वजह से एजेंसी को कई बार फायदा हुआ है. लेकिन सिर पर कैमरा लगे होने की वजह से वो डॉग्स पकड़े और मारे जाते थे. यह सिस्टम नाइन विजन सिस्टम के तहत बनाया गया था.

इसमें ऑडिओ व वीडियो दोनों की ही सुविधा होती है. यह फ्रांस की कंपनी से विकसित कराया गया था. लेकिन इस बार सारा सिस्टम अपग्रेड करते हुए कुत्तों के पिछले हिस्से में कैमरा लगाया जाएगा.

सरकार का यह कदम सराहनीय है. देश की आजादी से लेकर अब तक सेना की सुविधाओं और सुरक्षा के लिए हमेशा मांग उठती रही है. उसे नरेन्द्र मोदी की सरकार पूरा कर रही है. किसी भी सरकार के पास, किसी भी काम को करने के लिए वजह और बहाने दोनों होते हैं.

लेकिन ऐसे मुद्दों पर काम करना हर किसी के वश की बात नहीं. साहसिक और ऐतिहासिक काम करने की ताकत बिरले लोगों में ही होती है. बीते लगभग 70 सालों से अनुच्छेद 370 पर सिर्फ राजनीति होती थी. अपने देश की सरकारें हमेशा विश्व के दबाव का हवाला देकर उस पर हाथ डालने से बचती थीं.

लेकिन मोदी सरकार ने इसको अपने बल पर निरस्त कर दिया. इस तरह सेना की सुविधा को लेकर भी हमेशा राजनीति होती रही है.

कभी तकनीक का अभाव तो कभी बजट की कमी का हवाला देकर मामले को टाला जाता रहा. लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार अब ऐसे कार्यों के लिए काम करके सेना को मजबूत बना रही है जिससे उनकी जिंदगी और देश सुरक्षित रहे.

(लेखक पत्रकार हैं.)

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