प्रशांत-राबड़ी की तू-तू मैं-मैं
  • तेजस्वी यादव ने लालू की प्रशांत किशोर से पांच बार भेंट करने के दावे के साथ  प्रशांत किशोर के प्रस्ताव को ठुकराते हुए उन्हें  बैरंग लौटा दिया था
  • महागठंधन छोड़ भाजपा से नयी दोस्ती के चंद महीने के अंदर ही नीतीश महागठबंधन में लौटने की कोशिश कर रहे थे

अरुण कुमार पांडेय

अरबों रुपये के चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की गोपालगंज से रायसिना: मेरी राजनीतिक यात्रा नाम की 230 पृष्ठों की आत्मकथा में कई खुलासे, दावे और सफाई को लेकर तू-तू मैं-मैं तेज हो गयी है. 

लालू ने खुलासा किया है कि महागठंधन छोड़ भाजपा से नयी दोस्ती के चंद महीने के अंदर ही नीतीश महागठबंधन में लौटने की कोशिश कर रहे थे. 

इसी सिलसिले में नीतीश के चुनावी रणनीतिकार और अब जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर दूत बनकर लालू से कई बार मिले थे. पुस्तक के मुताबिक जदयू का राजद में विलय और 17वीं लोकसभा के चुनाव में नीतीश को पीएम का उम्मीदवार के रूप में पेश करने की पेशकश लेकर प्रशांत किशोर कई बार लालू से मिलने आये थे. 

राबड़ी देवी के साथ तेजस्वी यादव ने लालू की प्रशांत किशोर से पांच बार भेंट करने के दावे के साथ  प्रशांत किशोर के प्रस्ताव को ठुकराते हुए उन्हें  बैरंग लौटा दिया था. 

वहीं प्रशांत किशोर न सिर्फ प्रतिवाद बल्कि पलटवार भी किया कि पद  और राजकीय कोष का दुरुपयोग करने के मामले में सजायाफ्ता सच बोलने का संरक्षक बन रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद जब चाहें, मेरे साथ मीडिया के सामने बैठ जाएं, सबको पता चल जाएगा कि मेरे और उनके बीच क्या बात हुई और किसने क्या आफर दिया.

वैसे राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता और न स्थायी दुश्मन.  हाल के वर्षों के बिहार का ही राजनीतिक इतिहास देखें तो सहज ही इसका अनुमान लगाया जा सकता है. 

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किये जाने से जले भुने नीतीश कुमार ने भाजपा से 17 वर्षों पुरानी दोस्ती और सात वर्षों से सत्ता में साझेदारी समाप्त कर ली थी. 

लोकसभा के पिछले चुनाव में  बिहार में नमो विरोध बेअसर रहने के बाद 2015 में  बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने का नीतीश-लालू-कांग्रेस का संयुक्त प्रयास सफल हो गया.

इस चुनाव में नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति का लोहा माना. उन्हें अपना सलाहकार बनाकर सरकार में  कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया. 2017 में नीतीश ने लालू से राजनीतिक दोस्ती तोड़ फिर भाजपा से नयी दोस्ती कर ली.

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 28 अप्रैल के अंक में…

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