Mamata Banerjee को फिर से सीएम बनाएंगे Prashant Kishor

  • टीएमसी के लिए काम करेंगे प्रशांत किशोर
  • अगले महीने से शुरू करेंगे काम
  • कई पार्टियों के लिए कर चुके हैं काम

कई राजनेताओं को सत्ता के शिखर पर पहुंचाने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अब ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लिए काम करेंगे. लोकसभा चुनाव में ममता की पार्टी टीएमसी (TMC) की जो हालत हुई उससे उनका जनाधार लगातार बुरी तरह से खिसक रहा है. उनकी पार्टी के कई कद्दावर नेताओं ने भी हवा का रुख भांपते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया है.

प्रशांत किशोर और ममता बनर्जी के बीच आज (गुरुवार) आज बैठक हुई. बैठक में दोनों के बीच तकरीबन 2 घंटे तक बैठक में बातचीत हुई. जानकारी के मुताबिक प्रशांत एक महीने बाद ममता बनर्जी के लिए काम करना शुरू करेंगे.

कौन हैं प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) बड़े चुनावी रणनीतिकार हैं. वे 8 साल तक संयुक्त राष्ट्र में हेल्थ एक्सपर्ट के तौर पर काम कर चुके हैं. उन्हें पीके नाम से भी जाना जाता है. वे अभी तक बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू के लिए काम कर चुके हैं. 2012 में पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के लिए रणनीति बनाई थी.

2014 में मोदी को बनाया पीएम

2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर के कंधों पर ही थी. प्रशांत ने ही पीएम मोदी के लिए कैंपेन डिजाइन किया था.  सोशल मीडिया कैंपन, चाय पर चर्चा, 3 डी प्रचार, रन फॉर यूनिटी से मोदी को पीएम बनाने में मदद की थी.

नीतीश ने दी बड़ी जिम्मेदारी

2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जीत में भी उनका ही हाथ था. नीतीश कुमार को फिर से सीएम बनाने के लिए उन्हें रिटर्न गिफ्ट के तौर पर जेडीयू (JDU) का उपाध्यक्ष बना दिया गया है.

जगन मोहन रेड्डी को पहनाया ताज

2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव भी हुए थे. विधानसभा चुनावों में अपनी रणनीति से प्रशांत ने ही चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) को सत्ता से बाहर कर दिया. उनकी चुनावी रणनीति की बदौलत ही जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) की वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) ने आंध्र प्रदेश की सभी 25 सीटें जीतीं और विधानसभा में 175 में से 150 सीटों पर कब्जा जमाया.

कांग्रेस को नहीं दिला पाए जीत

2017 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव में प्रशांत कांग्रेस (Prashant Kishor) के लिए रणनीति तैयार कर रहे थे. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद भी कांग्रेस की हार हुई थी. हालांकि इस हार का श्रेय भी कांग्रेस (Congress) पार्टी को ही जाता है. जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के लोगों ने प्रशांत की रणनीति पर काम नहीं किया. जानकारी के मुताबिक प्रशांत ने एसपी से गठबंधन करने से भी मना किया था.

यूपी में प्रशांत भले ही कांग्रेस का बेडा पार ना लगा पाए हों, लेकिन पंजाब में कांग्रेस ने उन्हीं की रणनीति से सत्ता हासिल की है.

TMC को उनसे काफी उम्मीदें

लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है, उससे ममता बनर्जी की नींद हराम हो गई है. दिन-प्रतिदिन प्रदेश में बीजेपी का दायरा बढ़ता जा रहा है और टीएमसी का सिमटता.

ऐसे हालातों में एक बार फिर से सत्ता में वापसी करना ममता बनर्जी मुश्किल लग रहा है.

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