प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान देगा श्रमिकों को रोजगार, मिलेंगे 25,250 रुपए

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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोज़गार अभियान भारत में लॉकडाउन के कारण उत्पन्न हुए रोजगार संकट के प्रभाव से निपटने के लिए भारत सरकार की एक पहल है जो प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करेगी. यह एक ग्रामीण लोक निर्माण योजना है.

इस योजना के तहत 50 हजार करोड़ रुपए से 6 राज्यों के लिए 116 जिलों में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे. इस योजना में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, उत्तर प्रदेश के जिले शामिल हैं.

कोविड -19 के कारण देश में लगे लॉकडाउन की बीच विभिन्न शहरों से लाखों प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं. इस अचानक से लगे लॉकडाउन में, प्रवासी श्रमिकों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

ऐसी स्थिति में, इन मजदूरों को तत्काल राहत देने के लिए, केंद्र सरकार ने 20 जून को गरीब कल्याण रोज़गार अभियान शुरू किया.इस अभियान के तहत, विभिन्न क्षेत्रों में मजदूरों को 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा.

“इस अभियान का लक्ष्य”

श्रमिकों और कामगारों को घर के पास काम देना इस अभियान का लक्ष्य है.प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान गरीबों के कल्याण की भावना एवं रोजगार की जरूरत को पूरा करने का बहुत बड़ा साधन है. हमारा प्रयास है कि इस अभियान के जरिए श्रमिकों और कामगारों को घर के पास ही काम दिया जाए.

अभी तक आप अपने हुनर और मेहनत से शहरों को आगे बढ़ा रहे थे, अब अपने गांव को, अपने इलाके को आगे बढ़ाएंगे.सरकार ने इसके लिए 50,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है. गरीब कल्याण रोजगार अभियान 116 जिलों में चलेगा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि शुरुआत में, लोगों को 125 दिनों के लिए रोजगार प्रदान किया जाएगा.

इसके लिए फिलहाल 6 राज्यों के 116 जिलों का चयन किया गया है.इन जिलों में कम से कम 25,000 प्रवासी कामगारों को काम देने के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत गांवों में रोजगार के लिए, विकास के कामों के लिए करीब 25 कार्यक्षेत्रों की पहचान की गई है. ये 25 काम या प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो गांव की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े हैं, जो गांव के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हैं. ये काम अपने ही गांव में रहते हुए, अपने परिवार के साथ रहते हुए ही किए जाएंगे.

“योजना का बजट”

पीएमओ के अनुसार, 125 दिनों का यह अभियान मिशन मोड में चलाया जाएगा. 50 हजार करोड़ रुपये के फंड से एक तरफ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए विभिन्न प्रकार के 25 कार्यों को तेजी से कराया जाएगा. वहीं दूसरे ओर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा.यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा.

“इस अभियान से 25,250 रुपये तक कमा सकते हैं”

गरीब कल्याण रोज़गार अभियान के तहत, मनरेगा मजदूरी के अनुसार दैनिक मजदूरी दी जाएगी. एक श्रमिक को प्रतिदिन 202 रुपये मिलेंगे और यदि वह 125 दिनों तक काम करता है, तो वह इस योजना के तहत 25,250 रुपये कमा सकता है.

“दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों को होगा लाभ”

पीएमओ के अनुसार, 116 जिलों के 25 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों के साथ इस अभियान में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और उड़ीसा इन छह राज्यों को चुना गया है. इस अभियान से दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों के लाभान्वित होने का अनुमान है.
वहीं, देश में मौजूदा रोजगार संकट के बीच केंद्र और कई राज्य देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों को सरल बना रहे हैं. योगी आदित्यनाथ वाली यूपी सरकार ने हाल ही में एक श्रम आयोग का गठन किया है, जोकि श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा.

“कौन से कार्य इसमें शामिल है”

  • सामुदायिक स्वच्छता
  • परिसर ग्राम पंचायत भवन
  • राष्ट्रीय राजमार्ग का काम
  • जल संरक्षण और जल संचयन कार्य
  • कुओं का निर्माण
  • बागवानी का काम
  • आंगनवाड़ी केंद्र का काम
  • प्रधान मंत्री ग्रामीण आवास योजना
  • ग्रामीण सड़क और सीमा सड़क काम
  • भारतीय रेल
  • पीएम कुसुम योजना
  • जल जीवन मिशन
  • प्रधानमंत्री उर्जा गंगा परियोजना
  • कृषि विज्ञान केंद्र
  • खेत तालाब योजना
  • पशु शेड निर्माण
  • भेड़ / बकरी के लिए शेड का निर्माण
  • पोल्ट्री के लिए शेड निर्माण

“योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया”
सरकार ने कहा कि श्रमिक या मजदूरों की सूची जिन्हें श्रमिक विशेष या परिवहन के किसी अन्य माध्यम से गांवों में वापस भेजा गया है, पहले से ही केंद्र के पास है. उस सूची के आधार पर, उन्हें रोजगार प्रदान किया जाएगा.

उन मजदूरों की सूची जो खुद अपनी व्यवस्था करके गए हैं, उनकी सूची संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के पास भी हैं. फिर भी इन लोगों को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में जाना चाहिए और जांच करनी चाहिए कि उनका नाम सूची में है या नहीं. पूरे काम का प्रबंधन राज्य सरकार के अधिकारी करेंगे

हिंदुस्थान समाचार/कर्मवीर सिंह तोमर