RSS और उसके संगठनों की जांच पर चिट्ठी से बिहार में सियासी तूफान

नई दिल्ली/पटना, 17 जुलाई. 28 मई को जारी एक चिट्ठी ने बिहार के राजनीति हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है. इसमें आरएसएस और उसके अन्य संगठनों से जुड़े नेताओं की गतिविधियों का ब्योरा देने का निर्देश दिया गया था.

मोदी सरकार-2 के शपथ ग्रहण से दो दिन पहले 28 मई को जारी इस चिट्ठी में ‘अति आवश्यक’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था. वहीं, इसमें डेडलाइन 3 जून की दी गई थी. इस चिट्ठी के सामने आते ही बीजेपी के नेता नीतीश कुमार की नैतिकता पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं.

BJP सांसद ने नैतिकता पर उठाए सवाल
बीजेपी के राज्यसभा सांसद और आरएसएस से जुड़े रहे राकेश सिन्हा ने कहा है कि बिहार सरकार के आरएसएस से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का आदेश नैतिक रूप से गलत था.

वहीं, बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सच्चिदानंद राय ने कहा कि जिस दिन चुनाव खत्म हुए उस दिन से ही नीतीश कुमार की मंशा साफ है. वहीं पार्टी के एक अन्य एमएलसी संजय मयूख ने भी नीतीश सरकार से मामले का जवाब देने की मांग की.

BJP नेताओं की शीर्ष नेतृत्व से गुहार
सच्चिदानंद राय ने कहा कि 19 मई को चुनाव खत्म होने के साथ ही जेडीयू ने अनच्‍छेद-370, 35ए और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर जेडीयू का स्टैंड स्‍पष्‍ट करते हुए यह बता दिया था कि आने वाले समय में यह सहयोगी पार्टी मुश्किल खड़ी करेगी.

ऐसे में यह न तो गठबंधन के लिए सही है और न ही बिहार के लिए. मुझे उम्मीद है कि शीर्ष नेतृत्व इस पर जरूर संज्ञान लेगा.

बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष रंजन राय ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने ट्वीट किया, ‘कहां घिनौनी राजनीति में लगे पड़े हैं माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी…समाज की सेवा में लगे संघ एवं संघ के अंगों की जांच करवा कर क्या मिलेगा?

बिहार बाढ़, अपराध और बेरोज़गारी की चपेट में है उसका संज्ञान लीजिए…कुछ काम कीजिए. आपके पास नया आइडिया ख़त्म हो गया है.’

JDU ने साधी चुप्पी
बीजेपी के नेताओं द्वारा नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा करने के बीच जेडीयू ने इस मामले में चुप्पी साध ली है. बिहार जेडीयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं, मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता.

कांग्रेस ने CM नीतीश को दिया धन्यवाद
कांग्रेस ने नीतीश सरकार के फैसले की सराहना की है. पार्टी प्रवक्ता व एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि इस खुलासे के बाद भी अगर बीजेपी-जेडीयू की सरकार बनी रहती है तो ऐसा माना जाएगा कि यह सुशील मोदी की शह पर हो रहा है.

आशंका है कि इस खुलासे के बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन लगे, लेकिन आरएसएस की गतिविधि की जांच के फैसले को लेकर हम सीएम को धन्यवाद देते हैं.

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