Dr. Harshvardhan

आशुतोष कुमार सिंह

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता को मोदी सरकार-2 को मिले प्रचंड बहुमत में सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है. 

गरीबों के घर में उज्ज्वला योजना के माध्यम से एलपीजी गैस पहुंचाने से लेकर, प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना व आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों तक सस्ती दवाई और इलाज का पहुंचना, सरकार के पक्ष में गया. 

इन योजनाओं ने देश को दो जातियों में विभक्त किया. एक जो गरीब हैं और दूसरे जो गरीबों की मदद कर रहे हैं. इन्हीं बदली हुई सामाजिक परिस्थितियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पदभार ग्रहण समारोह में दिए संबोधन में रेखांकित भी कर रहे थे. 

सरकार को यह अच्छी तरह से समझ में आ गया है कि सेहत के मसले को सुलझा कर ही जनता के दिल में जगह बनाई जा सकती है. 

सेहत की प्राथमिकता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार-1 में जिस डॉ.हर्षवर्धन से स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी ले ली गई थी उन्हीं को इस बार केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है.

डॉ. हर्षवर्धन को एक बार पुनः स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं सहित देश का वो हर तबका खुश है जो देश को स्वस्थ देखना चाहता है. 

डॉ हर्षवर्धन का व्यक्तित्व व कृतित्व ही ऐसा है कि उनसे जो जुड़ता है, जुड़ता ही चला जाता है. 30 मई को डॉ. हर्षवर्धन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लिया और उसी दिन से वे अपने स्वभाव के अनुरूप काम पर जुट गए.

डॉ. हर्षवर्धन ने  3 जून को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि, “भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में पदभार संभाला.‪ 

मुझ पर विश्वास प्रकट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार प्रकट करता हूं. ‪देशवासियों का स्वास्थ्य व कल्याण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से है. 

इस दायित्व को पूरा करने का मेरा ईमानदार प्रयास रहेगा. मुझे खुशी है कि आज यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आशीर्वाद से देश के लोगों की सेवा करने, उनके स्वास्थ्य की चिंता व रक्षा करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. 

स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है लेकिन इसके साथ-साथ सभी लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए कुछ ना कुछ करना चाहिए.”

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 16 जून के अंक में…

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