PMO स्टाफ के साथ पीएम मोदी के मन की बात….

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यालय के अधिकारियों से मुलाक़ात. पीएम मोदी ने PMO स्टाफ को संबोधित किया.

पीएम ने पिछले पांच साल में समूचे PMO की प्रतिबद्धता और प्रयासों की सराहना की. उन्होंने हर किसी से फिर उसी प्रतिबद्धता से और मेहनत करके भारत के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरने का आग्रह किया.

NDA की संसदीय बोर्ड की बैठक का सीधा प्रसारण

NDA की संसदीय बोर्ड की बैठक का सीधा प्रसारणNational Democratic Alliance (NDA) Parliamentary Party meet at Central Hall of Parliament.सौ. – राज्यसभा टीवी

Hindusthan Samachar यांनी वर पोस्ट केले शनिवार, २५ मे, २०१९

ये हैं पीएम मोदी की बड़ी बातें
शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के स्टाफ और उनके परिवार वालों का अपने कार्यकाल के दौरान ऑफिस में समर्थन देने के लिए पीएम ने शुक्रिया अदा किया.

मोदी ने PMO के अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि लोगों की सरकार से काफी अपेक्षाएं हैं और इन अपेक्षाओं से टीम पीएमओ को डटकर काम करने की ऊर्जा मिलेगी.

पीएम ने पीएमओ में कार्यरत कर्मचारियों की जमकर तारीफ की. पीएम ने कहा कि कोई भी परिणाम तब तक नहीं मिलता, जब तक कोई समर्पित टीम नहीं मिलती है.

सपने कितने ही सुहाने क्यों न हों, तब तक परे नहीं होते जब तक साथियों की सोच काम को लेकर एक जैसी नहीं होती है. परिणाम तब मिलता है, जब पीएम की सोच और साथियों की सोच एक साथ मिलती हो.

आपमें से कई लोग हैं, जिन्होंने बहुत प्रधानमंत्री और मंत्री देखे हैं, लेकिन मैं पहला प्रधानमंत्री हूं, जिसने आपको देखा है. आपने मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं होने दिया, काम का बोझ मुझ पर नहीं आने दिया. आपके विचारों ने मुझे ताकत दी है.

मोदी ने टीम के सदस्यों को दिए अपने भाषण में उनके योगदान का जिक्र किया और कहा, “हमारे सफर में आपके परिवार वालों ने भी बड़ी भूमिका निभाई. उनके समर्थन के बिना ये संभव नहीं था. मैं आपके परिवार वालों को उनके समर्थन के लिए शुक्रिया कहना चाहता हूं.”

पांच साल की अखंड एकनिष्ठ साधना, जिसका लक्ष्य देश के समान्य व्यक्ति के जीवन में आशा और बदलाव संचारित करना.

पीएम जो भी विचार रखें, वह तो 10-15 मिनट में ही रखे जाते हैं, लेकिन उस एक लाइन को पकड़कर नीति का रूप देना एक लंबी प्रक्रिया होती है. यह सब टीम के बिना संभव नहीं होता है.

पांच साल तक, जिस इरादे से 2014 में चले थे 2019 तक हमने अपने मार्ग में जरा भी भटकाव नहीं आने दिया. हम समर्पण बढ़ाते गए. लोगों की अपेक्षाओं के कारण काम का दबाव बढ़ता गया. लोगों के विश्वास के कारण जब दबाव बढ़ता है तो वह ऊर्जा में बदल जाता है.

हम लोगों ने अनुभव किया कि जो देश की अपेक्षाओं का दबाव में हमारे लिए बोझ नहीं बना, बल्कि हमारी ऊर्जा बन गया.

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