छवि को लेकर पीएम मोदी सतर्क, जानें कितनी बार दी अपने सांसदों को नसीहतें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर बीजेपी नेताओं को नसीहत देने की कोशिश करते हैं.. मोदी का अंदाज कभी सेंस ऑफ ह्यूमर लिए तो कभी आक्रामक नजर आता है, लेकिन नसीहत की भाषा कभी-कभी साहित्यिक भी हो जाती है.

चुनाव नतीजों के बाद नरेंद्र मोदी ने बीजेपी नेताओं में खुद के अंदर सेवा भाव विकसित करने की सलाह दी. मोदी किसी का नाम नहीं लेते लेकिन उनका संदेश साफ होता है. पीएम मोदी कई मामलों में खामोशी को हजार जवाबों से अच्छा बेशक मानते हों, लेकिन कुछ मामलों में वो बेहद सख्त लहजे में भी बोलते हैं.

इस बार अपनी छवि को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा ही सतर्क हैं.. पिछली बार 50 सांसदों के टिकट काटने पड़े, क्योंकि सांसदों ने मोदी और पार्टियों की अपेक्षा के अनुरुप काम नहीं किया.
इस बार पीएम मोदी ने सासंदो को साफ तौर पर कहा कि लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने सांसदों को राजनीति के अलावा सामाजिक कार्य करने का भी आदेश दिया है.

उन्होंने कहा देश के सामने जल संकट है, उसके लिए भी सांसदों को काम करना चाहिए. इसके अलावा पीएम ने सांसदों को अपने इलाके के लिए कोई इनोवेटिव काम करने की सलाह दी है.

PM मोदी ने बीजेपी सांसदों को सदन में सक्रिय रहने की सलाह देते हुए कहा कि सदन में ज्यादा से ज्यादा मौजूद रहे और जनता की समस्याओं के बारे में बात करें..

मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पीएम ने अपने मंत्रियों को जल्दी दफ्तर आने और दफ्तर का काम घर पर ना करने की नसीहत दी थी. आज इसी बात को दोहराते हुए मंत्रियों को अपनी ड्यूटी पर आने को लेकर चेताया है…पीएम ने साफ कहा है जो मंत्री रोस्टर ड्यूटी में नहीं जाते उनके नाम मुझे दो, मुझे सबको ठीक करना आता है’

इससे पहले पीएम ने सत्ता संभालते ही एनडीए के अपने सासंदों को बिना भेदभाव के काम करने की नसीहत दी.

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी सांसदों को अलग-अलग वर्गों में बांटकर, उनके साथ बैठक कर रहे हैं. सांसदों को युवा, एसटी-एससी, ओबीसी, महिला और अन्य वर्गों में बांटा गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार हो रही बैठकों में राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के सांसदों सांसद शामिल हैं. सभी सांसदों से संसदीय मामलों के संबंध में भी बातचीत की जा रही है.
प्रधानमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करने जा रहे नरेंद्र मोदी ने अब तक अपने सांसदों को अलग-अलग कई मंत्र दिए हैं.

दिल्ली में सेवा भाव वालों से बचकर रहे सांसद
दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने से मोदी ने अपने सासंदों से कहा-दिल्ली में ऐसा गैंग रहता है, जो नए जनप्रतिनिधियों को टारगेट करता है और उनके सेवाभाव में जुट जाता है. इस तरह की सेवाभाव करने वालों से बचकर रहना. ये सेवाभावी आपकी बहुत सेवा करेंगे और आपको पंगु बना देंगे. आपको पता चलने के बाद भी आप उन्हें निकाल नहीं सकते हैं.

मीडिया से बचकर रहने की नसीहत
उन्होंने सासंदों को मीडिया से बचकर रहने को कहा. नव निर्वाचित सांसदों को बड़बोलेपन और मीडिया में छपने एवं दिखने की उत्कंठा से बचने की नसीहत दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल-आडवाणी भी कहते थे कि छपास और दिखास से बचना चाहिए. इससे बचकर आप खुद को भी बचा सकते हैं और दूसरों को भी बचा सकते हैं.

वीआईपी संस्कृति से बचें सांसद
वीआईपी संस्कृति से दूर रहने की भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि सांसदों को जरूरत पड़ने पर अन्य नागरिकों की तरह कतारों में भी खड़ा होना चाहिए. उन ”मैं चाहता हूं कि हमें जनता को ध्यान में रखकर खुद को बदलना चाहिए. लाल बत्ती हटाने से कोई आर्थिक फायदा भले ही न हो लेकिन जनता के बीच अच्छा मैसेज गया है.’

मंत्रियों को समय पर दफ्तर पहुंचने का मंत्र
मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पीएम ने अपने मंत्रियों को जल्दी दफ्तर आने और दफ्तर का काम घर पर ना करने की नसीहत दी. साथ ही ये कहा कि सीनियर मंत्री अपने जूनियर मंत्री को काम दे. सभी मंत्री ये तय कर लें कि उन्हें कार्यकर्ताओं से कब मिलना हैं. मंत्रियों को अपने सासंदों से भी मिलने का भी निर्देश दिया गया.

PM मोदी का 40 साल से ऊपर के सांसदों को ये लिए फिटनेस मंत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के एससी-एसटी सांसदों को फिट रहने की नसीहत भी दी. उन्होंने 40 साल से ज्यादा उम्र के सांसदों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने को कहा है.
पीएम मोदी ने बैठक में ये भी कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए स्वस्थ शरीर जरूरी है. इसलिए वे अपने शरीर को स्वस्थ रखने पर ध्यान दें.

महिला सांसदों को नसीहत
नवनिर्वाचित 17वीं लोकसभा में कुल 78 महिला सांसद हैं. महिला सांसदों को नसीहत देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सांसदों को नई जिम्मेदारियां लेनी चाहिए और उन्हें नए क्षेत्रों में काम करना चाहिए. महिला सांसद ऐसे क्षेत्रों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की दिशा में काम कर सकती हैं जहां कुपोषण की समस्या है.

प्रधानमंत्री मोदी की पिछली सरकार में भी मंत्रिपरिषद की बैठकें लगातार होती रहती थीं. वो सभी मंत्रियों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और उनके बारे में जनता को जागरूक करने के तरीके समझाते थे.

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