नेपाल में बनेगा अयोध्या जैसा राम मंदिर, पीएम ओली ने दिए आदेश

KP Sharma Oli
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एक बार फिर राम मंदिर का राग अलापना शुरू कर दिया है. उन्होंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अब अपने देश में भगवान राम का भव्य मंदिर बनाने की बात कह डाली है. कुछ ही समय पहले ओली ने राम का जन्मस्थान नेपाल में होने की बात कही थी जिसके बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी.

खबरों की मानें तो ओली ने इसके लिए स्थानीय प्रतिनिधियों को प्लान तैयार करने को कहा है पर अधिकारियों का कहना है कि पहले वहां के लोगों की असल समस्याएं हल की जाएं, उसके बाद राम मंदिर बनवाया जा सकता है. ओली ने चितवन के माडी के नगर निकाय अधिकारियों के साथ बैठक की थी. दो घंटे चली बैठक के दौरान ओली ने उनसे कहा कि नेपाल में राम मंदिर बनना चाहिए. उन्होंने फिर एक बार कहा कि भगवान का राम जन्म नेपाल की अयोध्यापुरी में हुआ था.

ओली ने बैठक के दौरान ये भी कहा कि अधिकारी स्थानीय लोगों से बातचीत करके वहां मौजूद ऐतिहासिक सबूतों को संरक्षित करें. इसके साथ ही और सबूत जुटाने के लिए अयोध्यापुरी में खुदाई का निर्देश भी दिया है. इसके अलावा पीएम ने माडी का नाम अयोध्यापुरी करने की सलाह भी दी है जिसके लिए नगर निकाय परिषद की राय पर फैसला किया जाएगा. साथ ही राम के जन्मस्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण और राम-सीता और लक्ष्मण की बड़ी प्रतिमा स्थापित करने को कहा है.

दशहरे में राम मंदिर निर्माण शुरू करने को कहा

बैठक में ओली ने इस साल दशहरे में रामनवमी के अवसर पर भूमि पूजन करने को कहा है. फिर मंदिर निर्माण का काम शुरू करने और दो साल के बाद फिर से रामनवमी पर मूर्ति का अनावरण करने के हिसाब से काम को आगे बढ़ाने की बात कही है.

यहां तक कि मंदिर निर्माण के लिए नेपाल सरकार की तरफ से आर्थिक सहयोग करने का भी आश्वासन दिया गया है. इतना ही नहीं उन्होंने माडी के पास रहे वाल्मिकी आश्रम, सीता के वनवास के दौरान रहे जंगल, लवकुश का जन्मस्थान आदि क्षेत्रों को भी विकसित करने को कहा है.

बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कुछ दिन पहले अपने एक बयान में कहा था कि नेपाल के ठोरी के पास रहे अयोध्यापुरी में भगवान राम का जन्मस्थान है. इस बयान के बाद नेपाल ही नहीं भारत में भी उनका काफी विरोध हुआ था. तब पड़ोसी देश के विदेश मंत्रालय ने सफाई पेश करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया था जिसमें कहा गया, ‘ये टिप्पणियां किसी राजनीतिक मुद्दे से जुड़ी नहीं थीं और किसी की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं था. इसका मतलब अयोध्या के सांस्कृतिक मूल्यों और महत्व  पर बहस शुरू करना नहीं है.’