“पीएम किसान सम्मान निधि योजना” से वंचित किसानों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज, किसान कर रहे हैं ये मांग

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. जिसमें 12 करोड छोटे और सीमांत किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर 4.9 एकड़ से कम भूमि है उन्हें न्यूनतम आय सहायता के रूप में 6000 रूपये तक मिलेंगे जो 2 हजार रुपए की तीन समान किस्तों में दिए जाएंगे.

1 फरवरी 2019 को भारत के 2019 अंतरिम केंद्रीय बजट के दौरान पीयूष गोयल द्वारा पहल की घोषणा की गई थी इस योजना की लागत प्रति वर्ष 75000 करोड रुपए होगी और यह 4 दिसंबर 2018 से लागू हो जाएगी. 6 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रत्येक किसान को तीन किस्तों में दिए जाएंगे.

इस योजना मे सीधे पैसा डीबीटी के जरिए किसान के बैंक खाते में पहुंच जाएगा.यह योजना छोटे किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है.बुवाई से ठीक पहले नकदी संकट से जूझने वाले किसानों को बीज खाद और अन्य लागत खर्च के लिए पैसा उपलब्ध होगा.इन छोटे किसानों में ज्यादातर सीमांत कृषक हैं जिनका खेती से पेट भरना भी मुश्किल है.

“पीएम किसान सम्मान योजना क्या है”
किसानों के कल्याण के लिए शुरू की गई अब तक की सभी योजनाओं में यह बहुत ही महत्वपूर्ण तथा लाभकारी सिद्ध हुई है. किसानों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो चुकी है. इस योजना के द्वारा लगभग 10 करोड किसानों को लाभान्वित किया जा चुका है.

वही इस स्कीम के जरिए सरकार ने लगभग 14.5 करोड़ किसान परिवारों को खेती-बाड़ी के खर्च को वहन करने के लिए 6 हजार रुपए सालाना देने की घोषणा की थी. अब तक इस स्कीम को शुरू हुए 17 महीने हो चुके हैं.


“सीमांत कृषकों के लिए लाभकारी”
यह योजना सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है.योजना का लाभ 2 हेक्टर खेती से कम रकबा वाले किसानों को दिया जाने का प्रावधान है.

सरकार ऐसे किसानों की जोत के साथ उनके बैंक खाते और अन्य विवरण केंद्र सरकार को मुहैया कराएंगी. उनकी पुष्टि होने के बाद केंद्र सरकार ऐसे किसानों के बैंक खातों में सीधे धन जमा कराएगी.योजना की सफलता में डिजिटल प्रणाली की भूमिका अहम साबित हुई है.

“योजना का बजट”
सरकार ने योजना के लिए 20000 करोड रुपये अग्रिम बजटीय प्रावधान करा लिया है जबकि योजना पर सालाना खर्च 75000 करोड रुपए आने का अनुमान है.छोटे किसानों के लिए इस योजना के आने से बुवाई से ठीक पहले उनके खाते में पैसा पहुंच जाता है. किसान अपने खेती-बाड़ी के कार्य सुगमता से कर पाते हैं.

“योजना का उद्देश्य”
इस योजना का एकमात्र उद्देश्य किसानों को को कर्जे से मुक्ति दिलाना तथा महाजन के चंगुल से मुक्त करना है. खेत की बुवाई करने से पहले छोटे किसान महाजन लोगों से महंगी दर पर ऋण लेते थे उसको वह चुका नहीं पाते थे और महाजन के चंगुल में फंस जाते थे. योजना के आ जाने से बुवाई से ठीक पहले उनके हाथ में नगदी आ जाती है. यह योजना सीमांत किसानों के लिए संजीवनी साबित हुई है.

“योजना से वंचित किसानों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज”
भारत सरकार द्वारा इस योजना से वंचित सीमांत किसानों को इसमें जोड़ने के लिए वेरीफिकेशन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. मोदी सरकार का मानना है कि सभी किसानों को इस स्कीम का लाभ पहुंचाया जाए और कोई किसान इससे वंचित ना रह जाए. इसके लिए वेरीफिकेशन की प्रक्रिया को जिला स्तर पर तेज कर दिया गया है.

इस स्कीम में अभी तक यह बात भी सामने आई है कि करीब सवा करोड़ लोगों के आवेदन आधार पैन और बैंक अकाउंट नंबर के वेरीफिकेशन ना होने के कारण पेंडिंग है. वहीं कुछ ऐसे जिले भी हैं जहां लाखों किसान रजिस्ट्रेशन के लिए प्रयासरत हैं.

कृषि मंत्रालय के अधिकारियों की माने तो वेरीफिकेशन की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद लाभार्थियों की संख्या 11 करोड़ हो जाएगी. वर्ष 2018-19 में इस स्कीम के लिए सरकार ने 75 हजार करोड रुपए का बजट रखा था लेकिन लाभार्थियों के अभाव में सिर्फ 54 हजार करोड रुपए ही खर्च हो पाया.

“पंजीकरण कैसे करें”
भारत सरकार ने किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी दी हुई है. लेकिन फिर भी उम्मीद के अनुसार लाभार्थी नहीं आ पाए.किसान जिले में स्थित कृषि कार्यालय मे ऑफलाइन पंजीकरण भी करा सकते हैं.

इस योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान संगठनों की तरफ से यह मांग आने लगी है की दी जाने वाली रकम 6000 रुपए से बढ़ाकर 24000 रुपए कर दी जाए.

किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि सही लोगों को ही योजना का लाभ मिले गलत लोग इसका फायदा न उठा पाएं एवं देर से पंजीकृत किसानों को योजना का लाभ योजना के शुरुआती साल से ही दिया जाए.

हिंदुस्तान समाचार/कर्मवीर सिंह तोमर

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