GST के दायरे में आएगा पेट्रोल और डीजल,आपको ऐसे होने वाला है फायदा

नई दिल्ली.एक बार फिर सत्ता में वापसी पर पीएम मोदी पूरी तरीके से तैयार है.भले पीएम मोदी ने एक बार फिर पीएम के पद के लिए अभी तक शपथ नहीं ली है. लेकिन उन्होंने देश को आगे बढ़ाने के एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है. उन्होंने आने वाले 100 दिनों का पूरा प्लान तैयार कर लिया है.

मोदी सरकार का एजेंडा-

इस एजेंडे के तहत मोदी सरकार सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में ला कर करने जा रही है.दरअसल मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल के 100 दिन के भीतर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में ला सकती है.

टैक्स छोड़ने के लिए तैयार सरकार-

पट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाए जाने से पहले सरकार को यह तय करना है कि क्या वह 20 हजार करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट छोड़ने को तैयार है, जो पेट्रोल डीजल को जीएसटी के बाहर रखे जाने की वजह से उसकी जेब में आ रहा है.जीएसटी को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था.

दुनिया में कहीं भी पेट्रोल-डीजल पर शुद्ध रूप से जीएसटी लागू नहीं है, इसलिए जानकारों की मानें तो भारत में भी यह जीएसटी और वैट का मिश्रण होगा.

इसलिए उठाया ये कदम-

सरकार ने ये कदम पेट्रोल और डीजल की कीमतों के लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए उठाने के बारे में सोच रही है. पिछले कई दिनों से लगातार पेट्रोल और डीजल महंगा होने के कारण केंद्र सरकार को भारी आलोचना झेलनी पड़ी है.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वसूले जा रहे भारी भरकम टैक्स के कारण ही पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम दिन प्रतिदिन आम आदमी के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं.ऐसा माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल के जीएसटी के दायरे में आने से सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सिर्फ इतने का होता है पेट्रोल –
अभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियां, सरकारी तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल 34.17 रुपए प्रति लीटर और डीजल 28 रुपए प्रति लीटर में सप्लाई करती हैं. उसके बाद तेल कंपनियां अपना मार्जिन जोड़कर डीलरों को 30.81 पैसे में एक लीटर पेट्रोल और डीजल 30.66 रुपए प्रति लीटर में बेचती हैं.

इतनी लगती है एक्साइज ड्यूटी-

उसके बाद पेट्रोल की इस कीमत में 17.98 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 17.98 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी जोड़ा जाता है, जो सीधा केंद्र सरकार के खाते में जाता है.उसके बाद पेट्रोल पंप डीलर्स को पेट्रोल पर 3.55 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर प्रति लीटर 2.49 रुपये कमीशन दिया जाता है. फिर इसके उपर राज्य सरकार वैट लगाती है.

दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर दिल्ली सरकार 27 फीसदी की दर से 14.54 रुपए और डीज़ल प्रति लीटर 16.75 फीसदी के दर से वैट वसूलती है जो 8.41 रुपए पर वैट वसूलती है. जिसके बाद दिल्ली में ग्राहकों को एक लीटर पेट्रोल 68.38 रुपए और डीजल प्रति लीटर 56.90 रुपए में मिलता है.

तेल कंपनियों को होता है मुनाफा-

मतलब एक लीटर पेट्रोल तैयार होता है केवल 34.17 रुपये में, लेकिन में तेल कंपनियों का मुनाफा, एक्साइज ड्यूटी, वैट, डीलर्स कमीशन लगभग 41 रुपए जोड़कर 68.38 रुपए में और एक लीटर डीजल करीब 29 रुपए तैयार होता हैं इसमें में तेल कंपनियों का मुनाफा, एक्साइज ड्यूटी, वैट, डीलर्स कमीशन लगभग 27 रुपए जुड़ने के बाद प्रति लीटर 56.90 रुपए में उपभोक्ताओं को डीजल मिलता है. यानी प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमत पर केंद्र और राज्य सरकार 120 फीसदी टैक्स वसूलती हैं.

28 फीसदी तक लग सकता है टैक्स-

अब ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर बात बन गई और पेट्रोल पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया गया, तो पेट्रोल आपको केवल 44-45 रुपए प्रति लीटर और डीजल केवल 42 से 43 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा. यानी पेट्रोल की कीमत में करीब 26 रुपए और डीजल की कीमत में लगभग 14 रुपए की कमी आएगी.

कैसे होगी सरकार के नुकसान की भरपाई-

इसके बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जीएसटी के दायरे में लाने के बाद सरकार को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी. अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा तो केवल केंद्र सरकार कई लाख करोड़ का नुकसान होगा. राज्य सरकारों को जो नुकसान होगा वह अलग है.

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