नक्सली गतिविधियों से चुनौतीपूर्ण होगा पंचायत चुनाव की संपन्नता

  • नक्सलवादियों के भय से उनके आधार क्षेत्र वाले कई पंचायतों में चुनाव में हिस्सा लेने के लिए उम्मीदवार आगे ही नहीं आए जहां किसी ने नामांकन भरने की जहमत ही नहीं उठाई.
  • त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के साथ ही चुनाव बहिष्कार के नक्सल पर्चों के माध्यम से पंचायत चुनाव को प्रभावित करते हुए नक्सली अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाने का पूरा प्रयास करने में लगे हुए हैं.

जगदलपुर,14 जनवरी (ह‍ि.स.). त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के साथ ही चुनाव बहिष्कार के नक्सल पर्चों के माध्यम से पंचायत चुनाव को प्रभावित करते हुए नक्सली अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाने का पूरा प्रयास करने में लगे हुए हैं.

नक्सलवादियों के भय से उनके आधार क्षेत्र वाले कई पंचायतों में चुनाव में हिस्सा लेने के लिए उम्मीदवार आगे ही नहीं आए जहां किसी ने नामांकन भरने की जहमत ही नहीं उठाई. अचानक बड़ी नक्सल गतिविधियों-वारदातों को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संपन्नता आसान नहीं होने वाली है.

नक्सलियों के द्वारा बस्तर संभाग में विगत दिनों लगातार हो रहे वारदातों से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों एवं कार्यकर्ताओं में भय का वातावरण देखा जा रहा है. नक्सली गतिविधियों में अचानक आई तेजी से नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में फिर एक बार वातावरण को अशांत कर दिया है.

अभी बीते 9 जनवरी को नारायणपुर जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर चेरपाल इलाके में रेत परिवहन कर रहे लगभग दर्जनों वाहनों में नक्सलियों ने आगजनी जैसी वारदात को अंजाम देकर एवं लगातार ग्रामीणोंं की हत्या की.

वहीं महाराष्ट्र, तेलांगना के सीमा भोपालपट्टनम में नक्सलियों के द्वारा बेनर, पाम्पलेट,पर्चे फेंक कर अपनी उपस्तिथि दर्ज करवाते हुए दहशत का वातावरण निर्मित करने में सफल हुए हैं. इन तमाम घटनाक्रमों से यह साफ जाहिर होता है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को प्रभावित करते हुए नक्सली अपनी मजबूत उपस्थिति के साथ बिखरते आधार को समेटने के प्रयास में लगे हुए हैं.

बस्तर संभाग में होने वाले लोकसभा , विधानसभा या फिर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो यह तो तय है कि नक्सली चुनाव को प्रभावित करते हैं. भले ही नक्सली चुनाव का बहिष्कार करते रहे हो लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अपने लाभ के लिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार को जीताने में पूरा योगदान देते रहे है.

भारतीय राजनीति में अपराधीकरण के गठजोड़ का उदाहरण बस्तर संभाग में हमें देखने को मिलता है यह कहना अनुचित नहीं होगा. इसकी बयानगी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले नक्सली गतिविधियों, वारदातों के यहां बढ़ने के साथ ही इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है.

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ह‍िन्‍दुस्‍थान समाचार / राकेश पांडे

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