ओरछा की धरोहर UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल…..

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में बुंदेला राजवंश के अद्भुत वास्तुशिल्प को दिखाती ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को की धरोहरों की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है.

UNESCO की अस्थायी धरोहर में शामिल– गौरतलब है कि किसी ऐतिहासिक विरासत या स्थल का पहले विश्व धरोहर स्थलों की यूनेस्को की अस्थायी सूची में ही शामिल होती है. ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में है.

15 अप्रैल को भेजा गया था प्रस्ताव– भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी के मुताबिक 15 अप्रैल 2019 को इस बारें में प्रस्ताव भेजा गया था. इसके साथ ही ऐतिहासिक तथ्यों के विवरण भी दिए गए थे.

रूद्र प्रताप सिंह ने की स्थापना– ओरछा की स्थापना 16वीं सदी में बुंदेला राजा रूद्र प्रताप सिंह ने की थी. यहां राजा महल या रामराजा मंदिर, शीश महल, जहांगीर महल, राम मंदिर, उद्यान और मंडप मशहूर हैं.

राजा की तरह पूजे जाते हैं भगवान राम– यहां के राम मंदिर की खास बात ये है कि उनकी पूजा भगवान की तरह नहीं बल्कि राजा की तरह होती है. दिलचस्प बात ये है कि मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले दर्शन पुलिस वाले करते हैं.

ये मीनारें हैं आकर्षण का केंद्र– इसके अलावा राय प्रवीन महल, चतुर्भुज मंदिर, फूलबाग, सुन्दर महल वस्तुशिल्प के दुर्लभ कृतियां हैं. यहीं भव्य परिसर में दो ऊंची मीनारें (वायु यंत्र) आकर्षण का केंद्र हैं. जिन्हें ‘सावन और भादों’ कहा जाता है.

बुंदेली कला का किया विकास– बुंदेला शासकों ने ही यहां बुंदेली स्थापत्य कला का विकास किया. यहां के स्थापत्यों में इमारतें, मंदिर, महल, बगीचे बेहद मनमोहक हैं. ओरछा में ही विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है.

साभार/ युगवार्ता

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