आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश रंग लाएगी-मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य  चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि आपराधिक रिकॉर्ड़ वाले उम्मीदवारों को रोकने के लिए चुनाव आयोग की कोशिशें जरुर रंग लाएंगी. उन्होंने कहा कि  देश में राजनीति में अपराधिकरण को रोकने के लिए आयोग पूरी शिद्दत के साथ काम कर रहा है. मौजूदा समय में दो साल के लिए जेल जा चुके प्रतिनिधियों को चुनाव न लड़ने का प्रावधान है. हालांकि इस तरह के प्रतिनिधियों को उम्रभर के लिए बैन करने की कोशिश की जा रही है.
HS News  के संपादक विजय त्रिवेदी से खास बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत  ने कहा-  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बहुत फर्क पड़ा है. अब चुनावी राज्यों में खड़े प्रतिनिधियों के अपराधिक रिकॉर्ड के  बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए लोगों को कम से कम तीन बार जानकारी देना जरुरी है. जिससे राज्य के लोगों को चुनाव में खड़े प्रतिनिधियों के अपराधिक रिकॉर्ड के बारे में पूरी जानकारी हो और वो इस जानकारी के आधार पर लोग अपना मत तय कर सकें.
चुनाव आयुक्त ने आगे बताया – मौजूदा समय में 2 साल जेल जा चुके प्रतिनिधिनयों को चुनाव न लड़ने देने का प्रावधान है. लेकिन अभी की पीआईएल में अपराधिक रिकॉर्ड वाले  प्रतिनिधियों को उम्रभर के लिए बैन करने की कोशिश की जा रही है.  ताकि इस तरह के लोगों को राजनीति से दूर रखा जा सकें.
चुनाव में धनबल  के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने कहा  कि चुनाव आयोग  चुनाव प्रचार के खर्च पर अपनी नजरें बनाए हुए है. जिसके लिए फ्लाइंग स्क्वाएड , स्टेटिटिक्स सर्विलेंस , वीडियो सर्विलेंस जैसी टीमें दिन रात लगी हुई है. इसका नतीजा है कि तेंलगाना में चुनावों से पहले ही 32 करोड़ सीज किए गए है.  इसे पहले तमिलनाडु में भी 700 करोड़ किए गए थे.
हालांकि ओपी रावत ने  इस बात को भी माना कि अभी केवल प्रतिनिधि की संपत्ति सीज की जाती  है. जिस वजह से पार्टी प्रचार में आराम से करोड़ो रुपये खर्च कर लेती है.  ओपी रावत ने बताया- चुनाव आयोग की सभी पार्टियों के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग की गई थी. जिसमें एक- दो पार्टियों को छोड़कर सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि पार्टियों के अत्यधिक खर्च पर भी चुनाव आयोग को प्रतिबंध लगाना चाहिए.
वहीं बातचीत के दौरान चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने इस साल होने वाले पांच राज्यों में चुनाव आयोग की तरफ से सभी व्यवस्थाएं पूरी हो जाने की भी जानकारी दी. साथ ही छत्तीसगढ़ के नक्सली प्रभावित 18 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी चिंता जताई.